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| Title | Pub. Date | Duration | |
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| भगवद गीता - अध्याय-15 : प्रवचन-10 | 17 Mar 2024 | 01:44:01 | |
पू.गुरूजी श्री स्वामी आत्मानन्द जी महाराज के महाशिवरात्रि ज्ञान-भक्ति शिविर पर आयोजित वेदान्त शिविर में श्रीमद्भगवद गीता के पुरुषोत्तम योग नामक पन्द्रवें अध्याय पर अपने प्रवचनों की श्रंखला के अंतिम प्रवचन में अध्याय के अंतिम पुरुषोत्तम प्रसंग पर पुनः विस्तृत चिंतन कर अध्याय का समापन किया। | |||
| भगवद गीता - अध्याय-15 : प्रवचन-09 | 16 Mar 2024 | 01:49:33 | |
पू.गुरूजी श्री स्वामी आत्मानन्द जी महाराज के महाशिवरात्रि ज्ञान-भक्ति शिविर पर आयोजित वेदान्त शिविर में श्रीमद्भगवद गीता के पुरुषोत्तम योग नामक पन्द्रवें अधयाय पर अपने प्रवचनों की श्रंखला के नवें प्रवचन में अध्याय के पन्द्रवें श्लोक का विस्तृत चिंतन करके, अंतिम प्रसंग में प्रवेश करते हुए १६वें से १८वें श्लोक का पाठ किया था। | |||
| प्रेरक कहानियाँ : नथनी | 03 Feb 2024 | 00:02:58 | |
वेदान्त आश्रम, इंदौर की पू स्वामिनी पूर्णानन्द जी से एक सुन्दर प्रेरक कहानी सुनें जिसका शीर्षक है - नथनी। (0224-01-sp) | |||
| साधना पञ्चकं : प्रवचन-09 (सूत्र-8) | 30 Aug 2022 | 01:02:18 | |
साधना पञ्चकं ज्ञान यज्ञ के ९वें प्रवचन में पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ग्रन्थ में प्रतिपादित आठवें सोपान एवं सूत्र पर प्रकाश डाला। इसमें शंकराचार्यजी कहते हैं की "निजगृहात तूर्णं विनिर्गमयताम" - अर्थात अपने घर से शीघ्र बाहर निकलो। जीवन के प्रारंभिक चरणों में हम लोगों का घर अत्यंत आवश्यक होता है। यहीं पर हम सबका विकास प्रारम्भ होता है। शरीर की स्वस्थता, शिक्षा का प्रारम्भ, संस्कारों की प्राप्ति सुन्दर दैवी मूल्यों का समावेश, अनेकों के स्नेह का भाजन बनाना - ये सब घर में ही होता है, इसलिए धर्माचरण का प्रारम्भ यहीं से होता है। लेकिन ध्यान रहे ईश्वर ने हमें ये पूरी दुनिया दी है, सभी को एक न एक दिन अपना ही घर देखना चाहिए। घर के अच्छे संस्कार और शिक्षा वो होती हैं जब हम एक न एक दिन पूरी दुनियां को अपना घर समझने में सक्षम हो। घर से निकलें तब ही तो सत्संग आदि सब मिलता है। आचार्य कहते हैं शीघ्र निकलो - तूर्णं। जैसे की चूजे को एक दिन अंडे से बाहर निकलना होता है, वैसे ही अपनी छोटी दुनियां से बाहर निकालो। जो व्यक्ति छोटी दुनियाँ में ही सुखी रहता है, वो अभी वस्तुतः खुद छोटा है, पराधीन है, और बाहरी अनुकूलता को ही सुख समझता है - वो वस्तुतः अभी अज्ञान और मोह में जी रहा है। ऐसे व्यक्ति को यह बात कभी भी समझ में नहीं आएगी की आत्मा ही आनंद स्वरुप होती है। | |||
| साधना पञ्चकं : प्रवचन-08 (सूत्र-7) | 29 Aug 2022 | 01:01:21 | |
साधना पञ्चकं ज्ञान यज्ञ के ८वें प्रवचन में पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ग्रन्थ में प्रतिपादित सातवें सोपान एवं सूत्र पर प्रकाश डाला। इस पर चर्चा से पूर्व उन्होंने पिछले सूत्र के महत्त्व पर पुनः बहुत जोर दिया, और कहा की भाव-सुख के प्रति द्वेष उत्पन्न करना यहाँ आपेक्षित नहीं है, बल्कि प्रयोजन यह है कि हम बाहरी दुनियां के प्रति उचित और प्रामाणिक दृष्टी उत्पन्न कर बाहरी सुख-दुःख के प्रति सम भाव रख कर अपना संकल्प सत्य के प्रति अभिमुख करें। अंतर्मुखता उत्पन्न करने के लिए हमारी बहिर्मुखता करना आवश्यक है। जब हमारी दृष्टी में बाहरी जगत से ही सुख-दुःख प्राप्त होता है - इसीको बहिर्मुखता कहते हैं, और जब निश्चय यह हो जाये की खजाना अपने अंदर ही है, तब इसे ही अंतर्मुखता कहते हैं। अतः इस सातवें सूत्र में आचार्यश्री कहते हैं की "आत्मेच्छा व्यवसियतां", अर्थात आत्मा-ज्ञान की तीव्र इच्छा उत्पन्न करें। | |||
| साधना पञ्चकं : प्रवचन-07 (सूत्र-6) | 28 Aug 2022 | 01:03:39 | |
साधना पञ्चकं ज्ञान यज्ञ के ७वें प्रवचन में पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ग्रन्थ में प्रतिपादित छठे सोपान एवं सूत्र पर प्रकाश डाला। इसमें शंकराचार्यजी कहते हैं की “भवसुखे दोषोनुसन्धीयताम", अर्थात, संसारी सुखों में विचार और प्रमाण पूर्वक दोष देखो, बाहरी विषयों में दोष का अनुसन्धान करो। अंतर्मुखता की प्राप्ति का यह सबसे बड़ा कदम होता है। जो व्यक्ति अपने से बाहर दुनियां में सुख की धारणा रखता है उसी को संसारी व्यक्ति कहते हैं, और जो व्यक्ति के अंदर यह प्रगाढ़ श्रद्धा हो गई है की जो दुनिया देखते देखते नष्ट हो जाती है उसमे कभी भी स्थाई सुख नहीं सकता है, वो ही अध्यात्म पथ का पथिक होता है। अगर ये विश्वास तक नहीं है तो कैसे अंदर कैसे सुख मिलेगा। ये विश्वास भी अँधा नहीं होना चाहिए, बल्कि विचार और अनुसन्धान पूर्वक निश्चय होना आवश्यक होता है। | |||
| साधना पञ्चकं : प्रवचन-06 (सूत्र-5) | 27 Aug 2022 | 01:00:13 | |
साधना पञ्चकं ज्ञान यज्ञ के ६ठे प्रवचन में पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ग्रन्थ में प्रतिपादित पांचवे सोपान एवं सूत्र पर प्रकाश डाला। इसमें शंकराचार्यजी कहते हैं की “पापौघः परिधूयतां" - अर्थात पाप के समूह को पूरी तरह से धो डालो। प्रत्येक जीवा का जन्म अज्ञान के कारण होता है, इसलिए बहार से देखा-देखी से गलत धारणाएं ही हम सब में घर कर जाती हैं, और मोहात्मक धारणाओं से प्रेरित विचार और कर्म सब पाप की श्रेणी में आते हैं। अतः प्रत्येक जीव के मन में पाप होता ही है। कई बार तो पाप का घड़ा पूरा भरा ही होता है - इनको दूर करने का प्रयास की यह पाँचवाँ सोपान है। | |||
| दृग-दृश्य विवेक प्रवचन - 18 | 27 Aug 2022 | 01:13:46 | |
प्रवचन-10b : शिविर के अंतिम (पाँचवे) दिन के अंतिम (सायं काल) प्रवचन के दूसरे भाग में, पू स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ‘दृग-दृश्य विवेक’ ग्रंथ के 31वें श्लोक तक की व्याख्या कर ग्रन्थ का समापन किया। | |||
| साधना पञ्चकं : प्रवचन-05 (सूत्र-4) | 26 Aug 2022 | 00:59:17 | |
साधना पञ्चकं ज्ञान यज्ञ के ५वें प्रवचन में पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ग्रन्थ में प्रतिपादित चौथे सोपान एवं सूत्र पर प्रकाश डाला। इसमें शंकराचार्यजी कहते हैं की "काम्ये मतिः त्यज्यताम" अर्थात - कामना की मति को त्यागो। इस सूत्र की भूमिका बनाते हुए पू स्वामीजी ने कहा कि - किसी भी सत्कार्य को करने में जो बाधाएं आती हैं, जिनके वजह से हम असमर्थ से दिखते हुए गलत दिशा में प्रवाहित होते चले जाते हैं - वे बाधाएं कोई बहार से नहीं आती हैं बल्कि वे सब हमारे ही मन की पूर्व कामनाएं आदि होती हैं। इन विक्षेपों के क्षणों में हम लोग राग और द्वेष आदि वृत्तियों का सामर्थ्य देख सकते हैं। हमारे सब संकल्प धरे के धरे रह जाते हैं। मन में विद्यमान राग और द्वेष से जनित काम और क्रोध आदि वृत्तियाँ एक दिन में नहीं आयी हैं बल्कि एक किसान की तरह हमने अपने ही मन में पहले काम के बीज डाले फिर सतत तीव्र भावनात्मक चिंतन के द्वारा उन्हें प्रबल किया और फिर ये प्रबल रूप लेते हैं। अगर हमें आज किसी दूसरी दिशा में चलना है तो पहले तो धीरज से पुरानी खेती के बीच रहते हुए उन्हें सहना होता है और नए बीज डालते हैं। यह कार्य बड़ी लगन से और धीरज से करना होता है। अगर हमारा निश्चय दृढ़ होगा तो निश्चित रूप से हमारी बगिया बदल जाएगी। बाहरी विषयों में कमी बुद्धि को त्यागना परम आवश्यक है। | |||
| दृग-दृश्य विवेक प्रवचन - 17 | 26 Aug 2022 | 01:10:56 | |
प्रवचन-10a : वेदान्त शिविर के अंतिम (पाँचवे) दिन के अंतिम (सायं काल) प्रवचन के पहले भाग में, पू स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ‘दृग-दृश्य विवेक’ ग्रंथ के 25वें श्लोक तक की व्याख्या करी। | |||
| साधना पञ्चकं : प्रवचन-04 (सूत्र-3) | 25 Aug 2022 | 00:53:41 | |
साधना पञ्चकं ज्ञान यज्ञ के चौथे प्रवचन में पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ग्रन्थ में प्रतिपादित तीसरे सूत्र पर प्रकाश डाला। इसमें आचार्यश्री कहते हैं की "तेनेशस्य विधीयताम अपचितिः" अर्थात - उसके द्वारा ईश्वर की पूजा संपन्न करो। उसके अर्थात अपने द्वारा अनुष्ठित सभी वेदोक्त कर्मों के द्वारा (जिसका पिछले सूत्र में विधान किया गया था) ईश्वर की पूजा करें। यहाँ यह दर्शनीय है कि हमारे सभी कर्म ईश्वर की आराधना की निमित्त बन जाएँ - न की कोई गिने-चुने कर्म-विशेष। इस सूत्र को क्रियान्वित करने के लिए एक तो हमें ईश्वर का ऐसा परिचय प्राप्त करना चाहिए जिसके फलस्वरूप हमारे ह्रदय में ईश्वर की महानता का प्रगाढ़ भाव जग जाए और उनकी सतत कृतज्ञता से युक्त होकर उनकी सेवा करने की इच्छा हो जाए। और दूसरी बात, अपने कर्म को ईश्वर अर्पित कैसे किया जाता है। इसके लिए यह बहुत अच्छा होता है की हम प्रारम्भ में अपने मंदिर में पूजा करना सीखें और फिर उसी पूजा-भाव को सभी कर्मों में समाविष्ट करें। विस्तृत विवेचना के लिए ध्यान से प्रवचन सुनें। | |||
| दृग-दृश्य विवेक प्रवचन - 16 | 25 Aug 2022 | 01:29:19 | |
प्रवचन-9 : वेदान्त शिविर के पाँचवे दिन के प्रातःकाल के प्रवचन में, पू स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ‘दृग-दृश्य विवेक’ ग्रंथ के 23वें श्लोक तक की व्याख्या करी। | |||
| साधना पञ्चकं : प्रवचन-03 (सूत्र-2) | 24 Aug 2022 | 00:54:37 | |
साधना पञ्चकं ज्ञान यज्ञ के तीसरे प्रवचन में पू.स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ग्रन्थ में प्रतिपादित दूसरे सूत्र की चर्चा करी। इसमें आचार्यश्री कहते हैं की "तदुदितं कर्म स्वनुष्ठीयतां " अर्थात - वेदों में प्रतिपादित कर्मों का बहुत ही सुंदरता से अनुष्ठान करें। यहाँ सनातन धर्म का दर्शन एवं परम्पराएं स्पष्ट होती हैं, की यद्यपि हमें मूल रूप से अपने अंदर जगना है लेकिन तब भी समस्त बाहर के कर्म बहुत सुंदरता से करना सीखना चाहिए। एक तो उचित कर्म के सुन्दर अनुष्ठान से हमारे संसारी जीवन की आवश्यकताएं निश्चित रूप से अच्छी तरह से पूरी होंगी, और साथ ही साथ ऐसे लोग ही एक काम में जब अपना मन लगाना सीखते हैं तो वे ही अध्यन, ध्यान जप आदि भी अच्छी तरह से कर पाएंगे। अतः यह सिद्धांत और उपदेश सोने पे सुहागा जैसा काम करेगा। | |||
| प्रेरक कहानियाँ : आज्ञा पालन | 27 Jan 2024 | 00:07:40 | |
वेदान्त आश्रम, इंदौर की पू स्वामिनी पूर्णानन्द जी से एक सुन्दर प्रेरक कहानी सुनें जिसका शीर्षक है - आज्ञा पालन। (0124-02-sp) | |||
| दृग-दृश्य विवेक प्रवचन - 15 | 24 Aug 2022 | 01:01:44 | |
प्रवचन-8b : शिविर के चौथे दिन के सायं काल के प्रवचन के दूसरे भाग में, पू स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ‘दृग-दृश्य विवेक’ ग्रंथ के 20वें श्लोक तक की व्याख्या करी। | |||
| साधना पञ्चकं : प्रवचन-02 (सूत्र-1) | 23 Aug 2022 | 00:48:29 | |
साधना पञ्चकं प्रवचन माला के दूसरे दिन स्वामी आत्मानन्दजी महाराज ने ग्रंथ में प्रवेश किया, और श्लोक पाठ के बाद पहले सूत्र पर विशद प्रकाश डाला। उन्होंने बताया की अध्यात्म यात्रा का श्रीगणेश वेदों के प्रति श्रद्धा उत्पन्न कर अपने मन और इंद्रियों को समन्वित एवं जागृत करने से होता है। इसके लिए नियमित रूप से वेद का पाठ एक सरल और सुन्दर तरीका है। यहाँ अधीयतां शब्द का अर्थ ज्ञान की सीधे प्राप्ति नहीं है, बल्कि केवल वेद पाठ मात्र है। अपनी परंपरा में वेद पाठ की बहुत महिमा है। यहाँ से ही प्रारंभ करें। | |||
| दृग-दृश्य विवेक प्रवचन - 14 | 23 Aug 2022 | 00:59:56 | |
प्रवचन-14 (8a) : शिविर के चौथे दिन के सायं काल के प्रवचन के पहले भाग में, पू स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ‘दृग-दृश्य विवेक’ ग्रंथ के 19वें श्लोक की आगे व्याख्या करी। | |||
| प्रेरक कहानियाँ : नज़रिआ (0822-03-sp) | 23 Aug 2022 | 00:04:17 | |
पू स्वामिनी पूर्णानन्द जी से एक सुन्दर प्रेरक कहानी सुनें जिसका शीर्षक है - नज़रिआ। | |||
| साधना पञ्चकं : प्रवचन-01 (भूमिका) | 22 Aug 2022 | 00:49:50 | |
साधना पञ्चकं प्रवचन माला का श्रीगणेश करते हुए वेदान्त आश्रम, इंदौर के प.पू. स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने "साधना पञ्चकं" नामक ग्रन्थ का अपनी अत्यंत प्रसन्न एवं गंभीर शैली में परिचय दिया। इसके अधिकारी, विषय, प्रयोजन एवं ग्रन्थ की भूमिका बताई। उन्होंने यह भी बताया की ‘साधना’ शब्द सापेक्ष्य होता है, अर्थात किसी भी साधक को सर्वप्रथम अपने साध्य की अति स्पष्टता एवं उसके प्रति अथाह प्रेम होना अनिवार्य होता है। साधन भी प्रामाणिक होना चाहिए, ज्यादातर साधक किसी साधन से आसक्त हो जाते हैं। यहाँ पर आचार्य ४० साधना के सोपान बताते हैं, एक से उचित लाभ लो फिर आगे बढ़ चलो। तब तक रुकना नहीं है जब तक परमात्मा से एक न हो जाएँ। | |||
| दृग-दृश्य विवेक प्रवचन - 13 | 22 Aug 2022 | 00:56:27 | |
प्रवचन-13 (7b): शिविर के चौथे दिन के प्रातःकाल के प्रवचन के दूसरे भाग में, पू स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ‘दृग-दृश्य विवेक’ ग्रंथ के 19वें श्लोक तक की व्याख्या करी। | |||
| दृग-दृश्य विवेक प्रवचन - 12 | 20 Aug 2022 | 00:52:19 | |
प्रवचन-7a : इस, शिविर के तीसरे दिन के प्रातःकाल के प्रवचन के पहला भाग में, पू स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ‘दृग-दृश्य विवेक’ ग्रंथ के 17वें श्लोक तक की व्याख्या करी। | |||
| दृग-दृश्य विवेक प्रवचन - 11 | 19 Aug 2022 | 00:42:12 | |
प्रवचन-6b : इस, शिविर के दूसरे दिन के दूसरे प्रवचन के दूसरे भाग में, पू स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ‘दृग-दृश्य विवेक’ ग्रंथ के 15वें श्लोक की व्याख्या करी। | |||
| दृग-दृश्य विवेक प्रवचन - 10 | 18 Aug 2022 | 01:06:24 | |
छठा प्रवचन-1 : शिविर के दूसरे दिन के दूसरे प्रवचन में, पू स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने दृग-दृश्य विवेक ग्रंथ के १4वें श्लोक की व्याख्या करी। | |||
| दृग-दृश्य विवेक प्रवचन - 09 | 17 Aug 2022 | 01:03:09 | |
पाँचवा प्रवचन-2 : शिविर के दूसरे दिन के दूसरे प्रवचन में, पू स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने दृग-दृश्य विवेक ग्रंथ के १३वें श्लोक की व्याख्या करी। | |||
| प्रेरक कहानियाँ : खिचड़ी भोग | 20 Jan 2024 | 00:06:16 | |
वेदान्त आश्रम, इंदौर की पू स्वामिनी पूर्णानन्द जी से एक सुन्दर प्रेरक कहानी सुनें जिसका शीर्षक है - खिचड़ी भोग। (0124-01-sp) | |||
| दृग-दृश्य विवेक प्रवचन - 08 | 16 Aug 2022 | 01:07:26 | |
पाँचवा प्रवचन-1 : शिविर के दूसरे दिन के दूसरे प्रवचन में, पू स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने दृग-दृश्य विवेक ग्रंथ के ११वें से १२वें श्लोकों की व्याख्या करी। | |||
| प्रेरक कहानियाँ : महाभारत युद्ध का भोजन प्रबंधन (0822-02-sp) | 16 Aug 2022 | 00:07:53 | |
पू स्वामिनी पूर्णानन्द जी से एक सुन्दर प्रेरक कहानी सुनें जिसका शीर्षक है - महाभारत युद्ध का भोजन प्रबंधन। | |||
| दृग-दृश्य विवेक प्रवचन - 07 (4) | 15 Aug 2022 | 01:38:30 | |
चौथा प्रवचन : शिविर के दूसरे दिन के दूसरे प्रवचन में, पू स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने दृग-दृश्य विवेक ग्रंथ के १०वें से १३वें श्लोकों की व्याख्या करी। | |||
| दृग-दृश्य विवेक प्रवचन - 06 (3b) | 13 Aug 2022 | 00:54:53 | |
तीसरे प्रवचन का दूसरा भाग : इस, शिविर के दूसरे दिन के पहले प्रवचन के दूसरे भाग में, पू स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने दृग-दृश्य विवेक ग्रंथ के 9वें श्लोक की व्याख्या करी। | |||
| दृग-दृश्य विवेक प्रवचन - 05 (3a) | 12 Aug 2022 | 00:57:16 | |
तीसरे प्रवचन का पहला भाग : इस, शिविर के दूसरे दिन के पहले प्रवचन के पहले भाग में, पू स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने दृग-दृश्य विवेक ग्रंथ के 8वें श्लोक की व्याख्या करी। | |||
| दृग-दृश्य विवेक प्रवचन - 04 (2b) | 11 Aug 2022 | 00:38:15 | |
दूसरे प्रवचन का दूसरा भाग इस, शिविर के दूसरे प्रवचन के दूसरे भाग में, पू स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने दृग-दृश्य विवेक ग्रंथ के 6 और 7वें श्लोकों की व्याख्या करी। | |||
| दृग-दृश्य विवेक प्रवचन - 03 (2a) | 10 Aug 2022 | 01:02:48 | |
दूसरे प्रवचन का पहला भाग इस दूसरे प्रवचन में पू स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने दृग-दृश्य विवेक ग्रंथ के श्लोक क्रमांक 2 से 5 तक की चर्चा करी। | |||
| दृग-दृश्य विवेक प्रवचन - 02 (1b) | 09 Aug 2022 | 01:03:13 | |
पहले प्रवचन का दूसरा भाग - इस पहले प्रवचन में पू स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ग्रंथ परिचय, लेखक परिचय, ग्रंथ की भूमिका बताई एवं उसके बाद पहले श्लोक में प्रवेश किया। | |||
| प्रेरक कहानियाँ : भगवान का धन्यवाद (0822-01-sp) | 09 Aug 2022 | 00:06:12 | |
पू स्वामिनी पूर्णानन्द जी से एक सुन्दर प्रेरक कहानी सुनें जिसका शीर्षक है - भगवान का धन्यवाद । | |||
| दृग-दृश्य विवेक प्रवचन - 01 (1a) | 08 Aug 2022 | 01:54:18 | |
इस पहले प्रवचन में पू स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ग्रंथ परिचय, लेखक परिचय, ग्रंथ की भूमिका बताई एवं उसके बाद पहले श्लोक में प्रवेश किया। | |||
| प्रेरक कहानियाँ : अहंकार और प्रेम | 31 Dec 2023 | 00:06:11 | |
वेदान्त आश्रम, इंदौर की पू स्वामिनी पूर्णानन्द जी से एक सुन्दर प्रेरक कहानी सुनें जिसका शीर्षक है - अहंकार और प्रेम। (1223-02-sp) | |||
| प्रेरक कहानियाँ : श्रीकृष्ण की गुरु दक्षिणा (0722-04-ss) | 09 Jul 2022 | 00:06:31 | |
पू स्वामिनी समतानन्द जी से एक सुन्दर प्रेरक कहानी सुनें जिसका शीर्षक है - श्रीकृष्ण की गुरु दक्षिणा। | |||
| प्रेरक कहानियाँ : मैं कौन हूँ? (0722-03-sp) | 07 Jul 2022 | 00:08:15 | |
पू स्वामिनी पूर्णानन्द जी से एक सुन्दर प्रेरक कहानी सुनें जिसका शीर्षक है - मैं कौन हूँ? | |||
| प्रेरक कहानियाँ : किरात-अर्जुन युद्ध (0722-02-sa) | 05 Jul 2022 | 00:08:32 | |
पू स्वामिनी अमितानन्द जी से एक सुन्दर ज्ञानवर्धक कहानी सुनें जिसका शीर्षक है - किरात-अर्जुन युद्ध। | |||
| प्रेरक कहानियाँ : अभिमान भंजन (0722-01-ss) | 02 Jul 2022 | 00:06:58 | |
पू स्वामिनी समतानन्द जी से एक सुन्दर प्रेरक कहानी सुनें जिसका शीर्षक है - अभिमान भंजन। | |||
| प्रेरक कहानियाँ : विश्वास (0622-13-sp) | 30 Jun 2022 | 00:04:30 | |
पू स्वामिनी पूर्णानन्द जी से एक सुन्दर प्रेरक कहानी सुनें जिसका शीर्षक है - विश्वास। | |||
| प्रेरक कहानियाँ : शिवजी का तांडव नृत्य (0622-12-sa) | 28 Jun 2022 | 00:04:57 | |
पू स्वामिनी अमितानन्द जी से एक सुन्दर ज्ञानवर्धक कहानी सुनें जिसका शीर्षक है - शिवजी का तांडव नृत्य। | |||
| प्रेरक कहानियाँ : श्रद्धा से गंगा-स्नान (0622-11-ss) | 25 Jun 2022 | 00:08:57 | |
पू स्वामिनी समतानन्द जी से आज एक सुन्दर प्रेरक कहानी सुनें जिसका शीर्षक है - श्रद्धा से गंगा-स्नान। | |||
| प्रेरक कहानियाँ : जीवन और समस्या (0622-10-sp) | 23 Jun 2022 | 00:06:41 | |
पू स्वामिनी पूर्णानन्द जी से आज एक सुन्दर प्रेरक कहानी सुनें जिसका शीर्षक है - जीवन और समस्या। | |||
| प्रेरक कहानियाँ : त्रिपुरासुर का वध (0622-09-sa) | 22 Jun 2022 | 00:04:30 | |
पू स्वामिनी अमितानन्द जी से एक सुन्दर ज्ञानवर्धक कहानी सुनें जिसका शीर्षक है - त्रिपुरासुर का वध। | |||
| प्रेरक कहानियाँ : असंतुष्टि (0622-08-ss) | 19 Jun 2022 | 00:09:57 | |
पू स्वामिनी समतानन्द जी से आज एक सुन्दर प्रेरक कहानी सुनें जिसका शीर्षक है - असंतुष्टि।
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| प्रेरक कहानियाँ : ईश्वर दर्शन (1223-01-sp) | 24 Dec 2023 | 00:07:29 | |
वेदान्त आश्रम, इंदौर की पू स्वामिनी पूर्णानन्द जी से एक सुन्दर प्रेरक कहानी सुनें जिसका शीर्षक है - ईश्वर दर्शन। | |||
| प्रेरक कहानियाँ : वास्तुशास्त्र (0622-07-sp) | 16 Jun 2022 | 00:05:44 | |
पू स्वामिनी पूर्णानन्द जी से आज एक सुन्दर प्रेरक कहानी सुनें जिसका शीर्षक है - वास्तुशास्त्र। | |||
| प्रेरक कहानियाँ : गया तीर्थ (0622-06-sa) | 14 Jun 2022 | 00:03:53 | |
पू स्वामिनी अमितानन्द जी से एक सुन्दर ज्ञानवर्धक कहानी सुनें जिसका शीर्षक है - गया तीर्थ। | |||
| प्रेरक कहानियाँ : श्री कृष्ण अवतार (0622-05-ss) | 11 Jun 2022 | 00:08:28 | |
पू स्वामिनी समतानन्द जी से आज एक सुन्दर प्रेरक कहानी सुनें जिसका शीर्षक है - श्री कृष्ण अवतार। | |||