Explore every episode of the podcast Bhagavad Gita Sanskrit
| Title | Pub. Date | Duration | |
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| गुरु-वन्दना | 14 Dec 2017 | 00:09:36 | |
गुरु-वन्दना : ।। ॐ श्री सद्गुरुदेव भगवान् की जय ।। जय सद्गुरुदेवं, परमानन्दं, अमर शरीरं अविकारी।। निर्गुण निर्मूलं, धरि स्थूलं, काटन शूलं भवभारी।। सूरत निज सोहं, कलिमल खोहं, जनमन मोहन छविभारी।। अमरापुर वासी, सब सुख राशी, सदा एकरस निर्विकारी।। अनुभव गम्भीरा, मति के धीरा, अलख फकीरा अवतारी।। योगी अद्वैष्टा, त्रिकाल द्रष्टा, केवल पद आनन्दकारी।। चित्रकूटिंह आयो, अद्वैत लखायो, अनुसुइया आसन मारी।। श्रीपरमहंस स्वामी, अन्तर्यामी, हैं बड़नामी संसारी।। हंसन हितकारी, जग पगुधारी, गर्व प्रहारी उपकारी।। सत्-पंथ चलायो, भरम मिटायो, रूप लखायो करतारी।। यह शिष्य है तेरो, करत निहोरो, मोपर हेरो प्रणधारी।। जय सद्गुरु………भारी।। ।। ॐ ।। | |||
| प्राक्कथनम् | 14 Dec 2017 | 01:32:10 | |
भगवान् श्रीकृष्णो यस्मिन् काले गीतायाः सदुपदेशं प्रादात्, तदानीं तस्य मनोभावाः कीदृशा आसन्? ते सर्वे मनोगता भावा वक्तुं न शक्यन्ते। केचन सन्ति भावा वर्णयितुं योग्याः केचन भावभङ्गिमयैव प्रकटयितुमर्हाः, अपरे शेषा भावाः क्रियात्मकाः सन्ति, तान् भावान् कोऽपि जनस्तत्पथमारुह्यैव ज्ञातुं शक्नोति। यस्मिन् स्तरे श्रीकृष्ण आसीत्, तदेव स्तरमात्मसात् कृत्वैव कश्चित् साधनाधनो महापुरुष एव जानाति, यत् गीता किं कथयति? स महापुरुषो गीतायाः वाक्यमेव वारम्वारं नावत्र्तयति, प्रत्युत् गीतोक्तभावान् स्पष्टरूपेण दर्शयति। कुतोहि या स्थितिः कृष्णस्य समक्षमासीत् सैव स्थितिस्तस्य महापुरुषस्य पुरतश्चकास्ति। एतस्मादेव स महापुरुषः सन्निरीक्षते जनान् दर्शयिष्यति, जनेषु तत् सञ्जागरयिष्यति च तत्पथे चालयिष्यत्यपि। पूज्यश्रीपरमहंसजी महाराजा अपि तत् स्तरस्यैव महापुरुषा आसन्। तेषां वाणीभिरन्तः प्रेरणाभिश्च गीतायाः, योऽर्थः सम्प्राप्तः, तस्यैव संकलनं ‘यथार्थगीता’ अस्ति। | |||
| प्रथमोऽध्याय: (संशयविषादयोग:) | 14 Dec 2017 | 01:43:46 | |
श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसम्वादे ‘संशयविषादयोगो’ नाम प्रथमोऽध्यायः। | |||
| द्वितीयोऽध्याय: (कर्मजिज्ञासा) | 14 Dec 2017 | 02:56:11 | |
श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसम्वादे ‘कर्मजिज्ञासा’ नाम द्वितीयोऽध्यायः। | |||
| तृतीयोऽध्याय: (शत्रुविनाशप्रेरणा) | 14 Dec 2017 | 01:55:20 | |
श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादे ‘शत्रुविनाशप्रेरणा’ नाम तृतीयोऽध्यायः। | |||
| चतुर्थोऽध्याय: (यज्ञकर्मस्पष्टीकरणम्) | 14 Dec 2017 | 02:22:26 | |
श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसम्वादे ‘यज्ञकर्मस्पष्टीकरणम्’ नाम चतुर्थोऽध्यायः। | |||
| पञ्चमोऽध्याय: (यज्ञभोक्तामहापुरुषस्थमहेश्वर:) | 14 Dec 2017 | 01:04:22 | |
श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसम्वादे ‘‘यज्ञभोक्तामहापुरुषस्थमहेश्वरः’’ नाम पञ्चमोऽध्यायः। | |||
| षष्ठोऽध्याय: (अभ्यासयोग:) | 14 Dec 2017 | 01:28:40 | |
श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसम्वादे ‘अभ्यासयोगो’ नाम षष्ठोऽध्यायः। | |||
| सप्तमोऽध्याय: (समग्रबोधः) | 14 Dec 2017 | 00:55:52 | |
श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसम्वादे ‘समग्रबोधः’ नाम सप्तमोऽध्यायः। | |||
| अष्टमोऽध्याय: (अक्षरब्रह्मयोग:) | 14 Dec 2017 | 01:20:48 | |
श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसम्वादे ‘अक्षरब्रह्मयोगो’ नामाष्टमोऽध्यायः। | |||
| नवमोऽध्याय: (राजविद्याजागृति:) | 14 Dec 2017 | 01:23:04 | |
श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसम्वादे ‘राजविद्याजागृति’ नाम नवमोऽध्यायः। | |||
| दशमोऽध्याय: (विभूतिवर्णनम्) | 14 Dec 2017 | 01:14:23 | |
श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसम्वादे ‘विभूतिवर्णनम्’ नाम दशमोऽध्यायः। | |||
| एकादशोऽध्याय: (विश्वरूपदर्शनयोग:). | 14 Dec 2017 | 01:40:21 | |
श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसम्वादे ‘विश्वरूपदर्शनयोगो’ नामैका- दशोऽध्यायः। | |||
| द्वादशोऽध्याय: (भक्तियोग:) | 14 Dec 2017 | 00:37:54 | |
श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसम्वादे ‘भक्तियोगो’ नाम द्वादशोऽध्यायः। | |||
| त्रयोदशोऽध्याय: (क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग:) | 14 Dec 2017 | 00:53:37 | |
श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसम्वादे ‘क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोगो’ नाम त्रयोदशोऽध्यायः। | |||
| चतुर्दशोऽध्याय: (गुणत्रयविभागयोग:) | 14 Dec 2017 | 00:44:04 | |
श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसम्वादे ‘गुणत्रयविभागयोगो’ नाम चतुर्दशोऽध्यायः। | |||
| पञ्चदशोऽध्याय: (पुरुषोत्तमयोग:) | 14 Dec 2017 | 00:50:15 | |
श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसम्वादे ‘पुरुषोत्तमयोगो’ नाम पञ्चदशोऽध्यायः। | |||
| षोडशोऽध्याय: (दैवासुरसम्पद्विभागयोग:) | 14 Dec 2017 | 00:42:53 | |
श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसम्वादे ‘दैवासुरसम्पद्विभागयोगो’ नाम षोडशोऽध्यायः। | |||
| सप्तदशोऽध्याय: (ॐ तत्सत् श्रद्धात्रयविभागयोग:) | 14 Dec 2017 | 00:52:05 | |
श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसम्वादे ‘ॐ तत्सत् श्रद्धात्रयविभागयोगो’ नाम सप्तदशोऽध्यायः। | |||
| अष्टादशोऽध्याय: (संन्यासयोग:) | 14 Dec 2017 | 02:24:42 | |
श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसम्वादे ‘संन्यासयोगो’ नामाष्टादशोऽध्यायः। | |||
| उपशम: | 14 Dec 2017 | 01:57:18 | |
स सर्वसमर्थोऽविनाशी परमात्मा मानवस्य हृदये निवसति। सम्पूर्णभावेन तस्य शरणं गन्तुं विधानमस्ति, येन शाश्वतं धाम, सदाविद्यमाना- शान्तिस्तथानन्तजीवनस्य, प्राप्तिर्भवति। | |||