Welcome to the Sanatan Sanskriti Podcast, your journey into the timeless wisdom of Indian culture and spirituality. Sanatana Dharma goes beyond religion; it’s a way of life and a value system with spiritual freedom at its core. Here, we explore pathways that honor and embrace the spiritual journeys of all. In each episode, uncover transformative insights and practical wisdom you can apply to your life immediately. Dive deep into Sanatan Sanskriti with me, Ashish P Mishra, and let's awaken our consciousness together. #IndianSpirituality #AshishPMishra #HindiPodcast #Mindfulness.
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EP 5 / Why did Brahma Ji raise Kartikeya hiding him from Shiv and Parvati? Devi Puran by Ashish P Mishra
Saison 10 · Épisode 38
vendredi 21 février 2025 • Durée 01:19:30
इस अंक में हम सुनेंगे कैसे भगवान् शंकर ने देवी पार्वती के समक्षविवाह का प्रस्ताव रखा? देवी पार्वती ने शिव के विवाह प्रस्ताव पर क्या उत्तर दिया ? शिव-पार्वती विवाह के लिए किसने और कौन सामुहूत निश्चित किया? शिव जी के विवाह का निमत्रण देवताओं के पासकौन ले कर गया ? कैसे हर्ष उल्हास से शिव पार्वती का विवाह हुआ? कैसे भगवान् शिव ने ब्रम्हा विष्णु और रति की प्रार्थना पर कामदेव को पुनः जीवित किया? कैसा था भगवान् शिव पार्वती का विवाह के बादका सुख विहार? पृथ्वी गाय का रूप ले कर ब्रम्हा जी के पासक्यों गई ? कैसे भगवान् कार्तिकेय का अवतरण हुआ और क्योंदेवताओं ने शिव पार्वती से छुपाया कार्तिकेय के साथ उनके सम्बन्ध को ? कैसे भगवान् कार्तिकेय बने देवताओं के सेनापति? भगवान् कार्तिकेय को मयूर वाहन के रूप में किसने प्रदान किया? किन किन देवताओं ने भगवान् कार्तिकेय को दिव्या अस्त्र प्रदान किये? कैसा था भगवान् कार्तिकेय और तारकासुर का भीषण युद्ध?
In this episode we will hear How did Lord Shankar propose marriage to Goddess Parvati? What was the reply of Goddess Parvati to Shiva's marriage proposal? Who decided which Muhurta for Shiva-Parvati's marriage? Who took the invitation of Shiva's marriage to the gods? How did Shiva and Parvati get married with great joy? How did Lord Shiva revive Kamadeva on the prayers of Brahma, Vishnu and Rati? How was Lord Shiva and Parvati's happiness after marriage?
Why did the Earth take the form of a cow and go to Brahma?
How was Lord Kartikeya born and why did the gods hide their relationship with Kartikeya from Shiva and Parvati? How did Lord Kartikeya become the commander of the gods? Who gave Lord Kartikeya the peacock as his vehicle? Which gods gave Lord Kartikeya divine weapons? How was the fierce battle between Lord Kartikeya and Tarakasur? How did Brahma Ji hand over Kartikeya to Shiv Parvati? Why did Lord Vishnu want to be born as the son of Mother Parvati? How did Mother Parvati fulfill the wish of Lord Vishnu? What is the secret of Ganesha's birth? Why did LordShankar cut off Ganesha's head? To which position did the Gods appoint Ganesha?स्वागत है सनातन संस्कृतिपॉडकास्ट में, जहां प्राचीन ज्ञान और आधुनिक भक्ति का संगमहोता है। मैं अशीष पी. मिश्रा, आपके साथ प्रस्तुत कर रहा हूं 11 एपिसोड की विशेष श्रृंखला, जो पूरी तरह से देवी भागवतपुराण की दिव्यता को समर्पित है। यह पवित्र ग्रंथ आध्यात्मिक ज्ञान का खजाना है, जो देवी दुर्गा की अनंत महिमा और शक्ति को दर्शाता है।
यदि आप माँ दुर्गा के भक्त हैं, नवरात्रि की पवित्रता को मानते हैं,या श्लोकों और मंत्रों की दिव्य ध्वनि से प्रेरणा पाते हैं,तो यह श्रृंखला विशेष रूप से आपके लिए बनाई गई है। महाभागवत देवीपुराण आपको दिव्य माँ से और गहराई से जोड़ने का अवसर प्रदान करेगा।
Welcome to Sanatan Sanskriti Podcast, your spiritual sanctuary, where ancient wisdom meetsmodern devotion. I am Ashish P. Mishra, and I am thrilled to present an11-episode series dedicated to the divine glory of Devi Bhagwat Puran.This timeless scripture is a treasure trove of spiritual enlightenment,invoking the sacred presence of Devi Durga and celebrating the eternal power ofShakti.
If you are a devotee of Maa Durga, someone who cherishes the essence of Navratri,or a seeker drawn to the rhythmic chants of shloks and mantras,this series is crafted for you. Whether you listen to Bhagwat Katha daily,meditate on divine energies, or simply seek inspiration in Hinduspirituality, Mahabhagwat Devi Puran will deepen yourconnection to the cosmic mother.
What is Devi BhagwatPuran?
The Devi BhagwatPuran is one of the most revered texts in Hindu scriptures. It is a comprehensive guide to understanding the cosmic energy personified by the Divine Mother, Devi Durga. Through enchanting stories, insightful Kathas,and spiritual philosophies, this scripture unravels the mysteries of creation,preservation, and destruction, all orchestrated by the goddess’s infinite energy. It highlights the importance of celebrating Navratri asa pathway to invoke the divine blessings of Maa Durga
EP 4 Where did Lord Shiva go to do penance for Parvati? Devi Puran by Ashish P Mishra
Saison 10 · Épisode 37
dimanche 16 février 2025 • Durée 01:14:56
इस अंक में हम सुनेंगे भगवान शंकर देवी पार्वती को पत्नी रूप में पाने के लिए तपस्या करने कहाँ गए ? देवर्षि नारद ने देवी का क्या महात्म्य बताया ? पार्वती जी हिमालय के उस भाग में क्यों गई जहाँ भगवान् शिव तप कर रहे थे ? ब्रम्हा जी ने तारकासुर को क्या वरदान दिया? इंद्र ने कामदेव को हिमालय पर क्यों भेजा ? शिव जी ने कामदेव को क्यों भस्म कर दिया ? ललिता सहस्त्रनाम किसने गा कर भगवती काली को प्रसन्न किया ? महादेव को भगवती महाकाली ने क्या वरदान दिया ?
In this episodewe will hear Where did Lord Shankar go to do penance to get Goddess Parvati as hiswife? What greatness of the Goddess did sage Narad describe? Why did Parvati go to that part of the Himalayas where Lord Shiva was doing penance? What boon did Brahma give to Tarakasur? Why did Indra send Kamadeva to the Himalayas? Why did Shiva burn Kamadeva to ashes?
Who pleased Goddess Kali by singing Lalita Sahasranama? What boon did Goddess Mahakali give to Mahadev?
आपका स्वागत है आपका सनातन संस्कृतिपॉडकास्ट में, जहां प्राचीन ज्ञान और आधुनिक भक्ति का संगमहोता है। मैं अशीष पी. मिश्रा, आपके साथ प्रस्तुत कर रहा हूं 11 एपिसोड की विशेष श्रृंखला, जो पूरी तरह से देवी भागवतपुराण की दिव्यता कोसमर्पित है। यह पवित्र ग्रंथ आध्यात्मिक ज्ञान का खजाना है, जो देवी दुर्गा की अनंत महिमा और शक्ति कोदर्शाता है।
यदि आप माँ दुर्गा के भक्त हैं, नवरात्रि की पवित्रता कोमानते हैं,या श्लोकों और मंत्रों की दिव्य ध्वनिसे प्रेरणा पाते हैं,तो यह श्रृंखलाविशेष रूप से आपके लिए बनाई गई है। चाहे आप भागवत कथा सुनते हों, ध्यान करते हों, या हिंदू आध्यात्मिकता में रुचि रखते हों, महाभागवत देवीपुराण आपको दिव्य माँसे और गहराई से जोड़ने का अवसर प्रदान करेगा।
देवी भागवत पुराण क्या है?
देवी भागवत पुराण हिंदूधर्मग्रंथों में से एक अत्यंत पवित्र और पूजनीय ग्रंथ है। यह देवी दुर्गा के रूपमें व्यक्त ब्रह्मांडीय ऊर्जा को समझने का मार्गदर्शक है। दिव्य कथाओं, ज्ञानवर्धक कथाओं और आध्यात्मिक दर्शन के माध्यम से, यह ग्रंथ सृष्टि, पालन और संहार के रहस्यों को प्रकट करता है, जिन्हें देवी की अनंत शक्ति द्वारा संचालितकिया गया है।
इस ग्रंथ में देवी की महिषासुर जैसे दानवोंके साथ हुई लड़ाइयों की कथा, , और धर्म के महत्व को भी बताया गया है। इसकेसाथ ही मनाने का महत्वऔर देवी दुर्गा की कृपा प्राप्त करने के मार्ग पर प्रकाश डाला गया है।
EP 28 Diti’s Conception 'Shrimad Bhagwat Katha' by Ashish P Mishra
"श्रीमद
भागवत कथा पॉडकास्ट के इस अंक में हम सुनेंगे अध्याय
14 जिसमें विदुर जी भगवान विष्णु के वराह अवतार और दानव हिरण्याक्ष
के साथ उनके युद्ध का उद्देश्य समझने की इच्छा व्यक्त करते हैं। इसके उत्तर में,
ऋषि मैत्रेय दिति की कथा सुनाते हैं, जो
दानवों की माता थीं और अपने पति, ऋषि कश्यप के साथ संतान पाने की तीव्र
इच्छा रखती थीं। लेकिन, दिति की अधीरता और दिव्य समय का पालन न
करने के कारण, उन्हें ऐसे दो विनाशकारी पुत्रों को
जन्म देने का भाग्य मिलता है - हिरण्याक्ष और हिरण्यकश्यप, जो
बाद में देवताओं का विरोध करेंगे और संसार में आतंक फैलाएंगे।
कश्यप उन्हें
सांत्वना देते हैं और यह भविष्यवाणी करते हैं कि यद्यपि उनके पुत्रों का अंत भगवान
विष्णु के हाथों होगा, उनका पोता
प्रह्लाद अपनी शुद्ध भक्ति का प्रतीक बनेगा और धर्म, करुणा और दया का प्रकाश स्तम्भ बनेगा। यह अध्याय दर्शाता है
कि दिव्य सिद्धांतों की अवहेलना के गंभीर परिणाम होते हैं, साथ ही यह भी कि सच्ची भक्ति से मुक्ति
और आत्म-परिवर्तन का मार्ग प्राप्त किया जा सकता है, जैसा कि भविष्य में प्रह्लाद की भक्ति के माध्यम से देखने
को मिलेगा।
in this Episod of
ShirmadBhagwat we ll listen howVidura seeks to understand the divine
purpose behind Lord Vishnu's incarnation as a boar (Varaha) and his battle with
the demon Hiraṇyākṣa. In response, Sage Maitreya recounts the story of Diti,
the mother of demons, and her intense longing for children with her husband,
Sage Kaśyapa. However, due to Diti's impatience and disregard for divine
timings, she is destined to bear two destructive sons, Hiraṇyākṣa and
Hiraṇyakaśipu, who would later oppose the gods and terrorize the universe.
Kaśyapa consoles her, foreseeing that while her sons will
meet their end at the hands of Lord Vishnu, her grandson, Prahlad, will embody
pure devotion, becoming a beacon of righteousness and compassion. The chapter
illuminates the consequences of disregarding divine principles while also
emphasizing redemption and the transformative power of sincere devotion through
the future devotion of Prahlad.
Ep 54 AyodhyaKand Shri Ramcharitmanas Podcast by Ashish P Mishra / Tulasi Ramayan
Saison 9 · Épisode 54
vendredi 15 septembre 2023 • Durée 35:19
श्री रामचरित मानस भाग – 54 / भरत जी को बुलावा , भरत जी का शोक
अयोध्या कांड में श्री राम के विवाह के
कुछ समय बाद राजा दशरथ जी
ने श्री राम का राज्याभिषेक करना चाहा। इस पर देवताओं
को चिंता हुई कि राम को राज्य मिल जाने पर रावण का
वध असम्भव हो जायेगा। व्याकुल होकर उन्होंने देवी सरस्वती से किसी प्रकार के उपाय करने की
प्रार्थना की। सरस्वती ने मन्थरा, जो कि कैकेयी की दासी थी, की बुद्धि को फेर दिया। मन्थरा की सलाह से कैकेयी कोपभवन में चली गई। दशरथ जब मनाने आये तो कैकेयी ने उनसे वरदान मांगे कि भरत को राजा बनाया जाये और राम को चौदह वर्षों के लिये वनवास
में भेज दिया जाये। राम के साथ सीता और लक्ष्मण भी वन चले गये। ऋंगवेरपुर में निषादराज गुह ने तीनों की बहुत सेवा की। कुछ
आनाकानी करने के बाद केवट ने तीनों को गंगा नदी के पार उतारा| प्रयाग पहुँच कर राम ने भरद्वाज मुनि से भेंट की। वहाँ से राम यमुना स्नान करते हुए वाल्मीकि ऋषि के आश्रम पहुँचे। वाल्मीकि से हुई मन्त्रणा के अनुसार राम, सीता और लक्ष्मण चित्रकूट में निवास करने लगे। अयोध्या में पुत्र के वियोग के कारण दशरथ का स्वर्गवास हो गया। वशिष्ठ ने भरत और शत्रुघ्न को उनके ननिहाल से बुलवा लिया।
वापस आने पर भरत ने अपनी माता कैकेयी की, उसकी कुटिलता के लिये, बहुत भर्तस्ना की और गुरुजनों
के आज्ञानुसार दशरथ की अन्त्येष्टि क्रिया कर दिया। भरत ने अयोध्या के राज्य को अस्वीकार कर दिया
और राम को मना कर वापस लाने के लिये समस्त स्नेहीजनों के साथ चित्रकूट चले गये। कैकेयी को भी अपने किये पर अत्यंत
पश्चाताप हुआ। सीता के माता-पिता सुनयना एवं जनक भी चित्रकूट पहुँचे। भरत तथा अन्य सभी लोगों ने राम के वापस अयोध्या जाकर राज्य करने का प्रस्ताव
रखा जिसे कि राम ने, पिता की
आज्ञा पालन करने और रघुवंश की रीति निभाने के लिये, अमान्य कर दिया।
भरत अपने स्नेही जनों के साथ राम की
पादुका को साथ लेकर वापस अयोध्या आ गये। उन्होंने राम की पादुका को राज सिंहासन पर
विराजित कर दिया स्वयं नन्दिग्राम में निवास करने लगे।
रामचरितमानस
१५वीं शताब्दी के कवि गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा लिखा गया महाकाव्य है, रामचरितमानस
को गोस्वामी जी ने सात काण्डों में विभक्त किया है। इन सात काण्डों के नाम इस प्रकार
हैं |
Ep 53 AyodhyaKand Shri Ramcharitmanas Podcast by Ashish P Mishra / Tulasi Ramayan
Saison 9 · Épisode 53
mardi 12 septembre 2023 • Durée 33:24
श्री रामचरित मानस भाग – 53 / सुमंत्र जी का अयोध्या वापस आना , दशरथ का शोक व निधन |
अयोध्या कांड में श्री राम के विवाह के
कुछ समय बाद राजा दशरथ जी
ने श्री राम का राज्याभिषेक करना चाहा। इस पर देवताओं
को चिंता हुई कि राम को राज्य मिल जाने पर रावण का
वध असम्भव हो जायेगा। व्याकुल होकर उन्होंने देवी सरस्वती से किसी प्रकार के उपाय करने की
प्रार्थना की। सरस्वती ने मन्थरा, जो कि कैकेयी की दासी थी, की बुद्धि को फेर दिया। मन्थरा की सलाह से कैकेयी कोपभवन में चली गई। दशरथ जब मनाने आये तो कैकेयी ने उनसे वरदान मांगे कि भरत को राजा बनाया जाये और राम को चौदह वर्षों के लिये वनवास
में भेज दिया जाये। राम के साथ सीता और लक्ष्मण भी वन चले गये। ऋंगवेरपुर में निषादराज गुह ने तीनों की बहुत सेवा की। कुछ
आनाकानी करने के बाद केवट ने तीनों को गंगा नदी के पार उतारा| प्रयाग पहुँच कर राम ने भरद्वाज मुनि से भेंट की। वहाँ से राम यमुना स्नान करते हुए वाल्मीकि ऋषि के आश्रम पहुँचे। वाल्मीकि से हुई मन्त्रणा के अनुसार राम, सीता और लक्ष्मण चित्रकूट में निवास करने लगे। अयोध्या में पुत्र के वियोग के कारण दशरथ का स्वर्गवास हो गया। वशिष्ठ ने भरत और शत्रुघ्न को उनके ननिहाल से बुलवा लिया।
वापस आने पर भरत ने अपनी माता कैकेयी की, उसकी कुटिलता के लिये, बहुत भर्तस्ना की और गुरुजनों
के आज्ञानुसार दशरथ की अन्त्येष्टि क्रिया कर दिया। भरत ने अयोध्या के राज्य को अस्वीकार कर दिया
और राम को मना कर वापस लाने के लिये समस्त स्नेहीजनों के साथ चित्रकूट चले गये। कैकेयी को भी अपने किये पर अत्यंत
पश्चाताप हुआ। सीता के माता-पिता सुनयना एवं जनक भी चित्रकूट पहुँचे। भरत तथा अन्य सभी लोगों ने राम के वापस अयोध्या जाकर राज्य करने का प्रस्ताव
रखा जिसे कि राम ने, पिता की
आज्ञा पालन करने और रघुवंश की रीति निभाने के लिये, अमान्य कर दिया।
भरत अपने स्नेही जनों के साथ राम की
पादुका को साथ लेकर वापस अयोध्या आ गये। उन्होंने राम की पादुका को राज सिंहासन पर
विराजित कर दिया स्वयं नन्दिग्राम में निवास करने लगे।
रामचरितमानस
१५वीं शताब्दी के कवि गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा लिखा गया महाकाव्य है, रामचरितमानस
को गोस्वामी जी ने सात काण्डों में विभक्त किया है। इन सात काण्डों के नाम इस प्रकार
हैं |
Ep 52 AyodhyaKand Shri Ramcharitmanas Podcast by Ashish P Mishra / Tulasi Ramayan
Saison 9 · Épisode 52
samedi 9 septembre 2023 • Durée 39:49
श्री रामचरित मानस भाग – 52 / श्री राम का चित्रकूट में निवास व कोल भीलों द्वारा सेवा
अयोध्या कांड में श्री राम के विवाह के
कुछ समय बाद राजा दशरथ जी
ने श्री राम का राज्याभिषेक करना चाहा। इस पर देवताओं
को चिंता हुई कि राम को राज्य मिल जाने पर रावण का
वध असम्भव हो जायेगा। व्याकुल होकर उन्होंने देवी सरस्वती से किसी प्रकार के उपाय करने की
प्रार्थना की। सरस्वती ने मन्थरा, जो कि कैकेयी की दासी थी, की बुद्धि को फेर दिया। मन्थरा की सलाह से कैकेयी कोपभवन में चली गई। दशरथ जब मनाने आये तो कैकेयी ने उनसे वरदान मांगे कि भरत को राजा बनाया जाये और राम को चौदह वर्षों के लिये वनवास
में भेज दिया जाये। राम के साथ सीता और लक्ष्मण भी वन चले गये। ऋंगवेरपुर में निषादराज गुह ने तीनों की बहुत सेवा की। कुछ
आनाकानी करने के बाद केवट ने तीनों को गंगा नदी के पार उतारा| प्रयाग पहुँच कर राम ने भरद्वाज मुनि से भेंट की। वहाँ से राम यमुना स्नान करते हुए वाल्मीकि ऋषि के आश्रम पहुँचे। वाल्मीकि से हुई मन्त्रणा के अनुसार राम, सीता और लक्ष्मण चित्रकूट में निवास करने लगे। अयोध्या में पुत्र के वियोग के कारण दशरथ का स्वर्गवास हो गया। वशिष्ठ ने भरत और शत्रुघ्न को उनके ननिहाल से बुलवा लिया।
वापस आने पर भरत ने अपनी माता कैकेयी की, उसकी कुटिलता के लिये, बहुत भर्तस्ना की और गुरुजनों
के आज्ञानुसार दशरथ की अन्त्येष्टि क्रिया कर दिया। भरत ने अयोध्या के राज्य को अस्वीकार कर दिया
और राम को मना कर वापस लाने के लिये समस्त स्नेहीजनों के साथ चित्रकूट चले गये। कैकेयी को भी अपने किये पर अत्यंत
पश्चाताप हुआ। सीता के माता-पिता सुनयना एवं जनक भी चित्रकूट पहुँचे। भरत तथा अन्य सभी लोगों ने राम के वापस अयोध्या जाकर राज्य करने का प्रस्ताव
रखा जिसे कि राम ने, पिता की
आज्ञा पालन करने और रघुवंश की रीति निभाने के लिये, अमान्य कर दिया।
भरत अपने स्नेही जनों के साथ राम की
पादुका को साथ लेकर वापस अयोध्या आ गये। उन्होंने राम की पादुका को राज सिंहासन पर
विराजित कर दिया स्वयं नन्दिग्राम में निवास करने लगे।
रामचरितमानस
१५वीं शताब्दी के कवि गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा लिखा गया महाकाव्य है, रामचरितमानस
को गोस्वामी जी ने सात काण्डों में विभक्त किया है। इन सात काण्डों के नाम इस प्रकार
हैं |
Ep 51 AyodhyaKand Shri Ramcharitmanas Podcast by Ashish P Mishra / Tulasi Ramayan
Saison 9 · Épisode 51
jeudi 31 août 2023 • Durée 26:25
श्री रामचरित मानस भाग – 51 - श्री राम वाल्मीकि जी की भेंट व श्री राम का चित्रकूट आगमन |
अयोध्या कांड में श्री राम के विवाह के
कुछ समय बाद राजा दशरथ जी
ने श्री राम का राज्याभिषेक करना चाहा। इस पर देवताओं
को चिंता हुई कि राम को राज्य मिल जाने पर रावण का
वध असम्भव हो जायेगा। व्याकुल होकर उन्होंने देवी सरस्वती से किसी प्रकार के उपाय करने की
प्रार्थना की। सरस्वती ने मन्थरा, जो कि कैकेयी की दासी थी, की बुद्धि को फेर दिया। मन्थरा की सलाह से कैकेयी कोपभवन में चली गई। दशरथ जब मनाने आये तो कैकेयी ने उनसे वरदान मांगे कि भरत को राजा बनाया जाये और राम को चौदह वर्षों के लिये वनवास
में भेज दिया जाये। राम के साथ सीता और लक्ष्मण भी वन चले गये। ऋंगवेरपुर में निषादराज गुह ने तीनों की बहुत सेवा की। कुछ
आनाकानी करने के बाद केवट ने तीनों को गंगा नदी के पार उतारा| प्रयाग पहुँच कर राम ने भरद्वाज मुनि से भेंट की। वहाँ से राम यमुना स्नान करते हुए वाल्मीकि ऋषि के आश्रम पहुँचे। वाल्मीकि से हुई मन्त्रणा के अनुसार राम, सीता और लक्ष्मण चित्रकूट में निवास करने लगे। अयोध्या में पुत्र के वियोग के कारण दशरथ का स्वर्गवास हो गया। वशिष्ठ ने भरत और शत्रुघ्न को उनके ननिहाल से बुलवा लिया।
वापस आने पर भरत ने अपनी माता कैकेयी की, उसकी कुटिलता के लिये, बहुत भर्तस्ना की और गुरुजनों
के आज्ञानुसार दशरथ की अन्त्येष्टि क्रिया कर दिया। भरत ने अयोध्या के राज्य को अस्वीकार कर दिया
और राम को मना कर वापस लाने के लिये समस्त स्नेहीजनों के साथ चित्रकूट चले गये। कैकेयी को भी अपने किये पर अत्यंत
पश्चाताप हुआ। सीता के माता-पिता सुनयना एवं जनक भी चित्रकूट पहुँचे। भरत तथा अन्य सभी लोगों ने राम के वापस अयोध्या जाकर राज्य करने का प्रस्ताव
रखा जिसे कि राम ने, पिता की
आज्ञा पालन करने और रघुवंश की रीति निभाने के लिये, अमान्य कर दिया।
भरत अपने स्नेही जनों के साथ राम की
पादुका को साथ लेकर वापस अयोध्या आ गये। उन्होंने राम की पादुका को राज सिंहासन पर
विराजित कर दिया स्वयं नन्दिग्राम में निवास करने लगे।
रामचरितमानस
१५वीं शताब्दी के कवि गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा लिखा गया महाकाव्य है, रामचरितमानस
को गोस्वामी जी ने सात काण्डों में विभक्त किया है। इन सात काण्डों के नाम इस प्रकार
हैं |
Ep 50 AyodhyaKand Shri Ramcharitmanas Podcast by Ashish P Mishra / Tulasi Ramayan
Saison 9 · Épisode 50
mardi 29 août 2023 • Durée 27:36
श्री रामचरित मानस भाग – 50 - श्री राम जानकी का ग्राम वासियों से संवाद
अयोध्या कांड में श्री राम के विवाह के
कुछ समय बाद राजा दशरथ जी
ने श्री राम का राज्याभिषेक करना चाहा। इस पर देवताओं
को चिंता हुई कि राम को राज्य मिल जाने पर रावण का
वध असम्भव हो जायेगा। व्याकुल होकर उन्होंने देवी सरस्वती से किसी प्रकार के उपाय करने की
प्रार्थना की। सरस्वती ने मन्थरा, जो कि कैकेयी की दासी थी, की बुद्धि को फेर दिया। मन्थरा की सलाह से कैकेयी कोपभवन में चली गई। दशरथ जब मनाने आये तो कैकेयी ने उनसे वरदान मांगे कि भरत को राजा बनाया जाये और राम को चौदह वर्षों के लिये वनवास
में भेज दिया जाये। राम के साथ सीता और लक्ष्मण भी वन चले गये। ऋंगवेरपुर में निषादराज गुह ने तीनों की बहुत सेवा की। कुछ
आनाकानी करने के बाद केवट ने तीनों को गंगा नदी के पार उतारा| प्रयाग पहुँच कर राम ने भरद्वाज मुनि से भेंट की। वहाँ से राम यमुना स्नान करते हुए वाल्मीकि ऋषि के आश्रम पहुँचे। वाल्मीकि से हुई मन्त्रणा के अनुसार राम, सीता और लक्ष्मण चित्रकूट में निवास करने लगे। अयोध्या में पुत्र के वियोग के कारण दशरथ का स्वर्गवास हो गया। वशिष्ठ ने भरत और शत्रुघ्न को उनके ननिहाल से बुलवा लिया।
वापस आने पर भरत ने अपनी माता कैकेयी की, उसकी कुटिलता के लिये, बहुत भर्तस्ना की और गुरुजनों
के आज्ञानुसार दशरथ की अन्त्येष्टि क्रिया कर दिया। भरत ने अयोध्या के राज्य को अस्वीकार कर दिया
और राम को मना कर वापस लाने के लिये समस्त स्नेहीजनों के साथ चित्रकूट चले गये। कैकेयी को भी अपने किये पर अत्यंत
पश्चाताप हुआ। सीता के माता-पिता सुनयना एवं जनक भी चित्रकूट पहुँचे। भरत तथा अन्य सभी लोगों ने राम के वापस अयोध्या जाकर राज्य करने का प्रस्ताव
रखा जिसे कि राम ने, पिता की
आज्ञा पालन करने और रघुवंश की रीति निभाने के लिये, अमान्य कर दिया।
भरत अपने स्नेही जनों के साथ राम की
पादुका को साथ लेकर वापस अयोध्या आ गये। उन्होंने राम की पादुका को राज सिंहासन पर
विराजित कर दिया स्वयं नन्दिग्राम में निवास करने लगे।
रामचरितमानस
१५वीं शताब्दी के कवि गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा लिखा गया महाकाव्य है, रामचरितमानस
को गोस्वामी जी ने सात काण्डों में विभक्त किया है। इन सात काण्डों के नाम इस प्रकार
हैं |
Ep 49 AyodhyaKand Shri Ramcharitmanas Podcast by Ashish P Mishra / Tulasi Ramayan
Saison 9 · Épisode 49
dimanche 27 août 2023 • Durée 35:36
श्री रामचरित मानस भाग – 49 श्री राम का भरद्वाज मुनि के आश्रम में आगमन |
अयोध्या कांड में श्री राम के विवाह के
कुछ समय बाद राजा दशरथ जी
ने श्री राम का राज्याभिषेक करना चाहा। इस पर देवताओं
को चिंता हुई कि राम को राज्य मिल जाने पर रावण का
वध असम्भव हो जायेगा। व्याकुल होकर उन्होंने देवी सरस्वती से किसी प्रकार के उपाय करने की
प्रार्थना की। सरस्वती ने मन्थरा, जो कि कैकेयी की दासी थी, की बुद्धि को फेर दिया। मन्थरा की सलाह से कैकेयी कोपभवन में चली गई। दशरथ जब मनाने आये तो कैकेयी ने उनसे वरदान मांगे कि भरत को राजा बनाया जाये और राम को चौदह वर्षों के लिये वनवास
में भेज दिया जाये। राम के साथ सीता और लक्ष्मण भी वन चले गये। ऋंगवेरपुर में निषादराज गुह ने तीनों की बहुत सेवा की। कुछ
आनाकानी करने के बाद केवट ने तीनों को गंगा नदी के पार उतारा| प्रयाग पहुँच कर राम ने भरद्वाज मुनि से भेंट की। वहाँ से राम यमुना स्नान करते हुए वाल्मीकि ऋषि के आश्रम पहुँचे। वाल्मीकि से हुई मन्त्रणा के अनुसार राम, सीता और लक्ष्मण चित्रकूट में निवास करने लगे। अयोध्या में पुत्र के वियोग के कारण दशरथ का स्वर्गवास हो गया। वशिष्ठ ने भरत और शत्रुघ्न को उनके ननिहाल से बुलवा लिया।
वापस आने पर भरत ने अपनी माता कैकेयी की, उसकी कुटिलता के लिये, बहुत भर्तस्ना की और गुरुजनों
के आज्ञानुसार दशरथ की अन्त्येष्टि क्रिया कर दिया। भरत ने अयोध्या के राज्य को अस्वीकार कर दिया
और राम को मना कर वापस लाने के लिये समस्त स्नेहीजनों के साथ चित्रकूट चले गये। कैकेयी को भी अपने किये पर अत्यंत
पश्चाताप हुआ। सीता के माता-पिता सुनयना एवं जनक भी चित्रकूट पहुँचे। भरत तथा अन्य सभी लोगों ने राम के वापस अयोध्या जाकर राज्य करने का प्रस्ताव
रखा जिसे कि राम ने, पिता की
आज्ञा पालन करने और रघुवंश की रीति निभाने के लिये, अमान्य कर दिया।
भरत अपने स्नेही जनों के साथ राम की
पादुका को साथ लेकर वापस अयोध्या आ गये। उन्होंने राम की पादुका को राज सिंहासन पर
विराजित कर दिया स्वयं नन्दिग्राम में निवास करने लगे।
रामचरितमानस
१५वीं शताब्दी के कवि गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा लिखा गया महाकाव्य है, रामचरितमानस
को गोस्वामी जी ने सात काण्डों में विभक्त किया है। इन सात काण्डों के नाम इस प्रकार
हैं |
Ep 48 AyodhyaKand Shri Ramcharitmanas Podcast by Ashish P Mishra / Tulasi Ramayan
Saison 9 · Épisode 48
vendredi 25 août 2023 • Durée 33:36
श्री रामचरित मानस भाग – 48 सुमंत्र जी का श्री राम को वापस अयोध्या लौटने का आग्रह |
अयोध्या कांड में श्री राम के विवाह के
कुछ समय बाद राजा दशरथ जी
ने श्री राम का राज्याभिषेक करना चाहा। इस पर देवताओं
को चिंता हुई कि राम को राज्य मिल जाने पर रावण का
वध असम्भव हो जायेगा। व्याकुल होकर उन्होंने देवी सरस्वती से किसी प्रकार के उपाय करने की
प्रार्थना की। सरस्वती ने मन्थरा, जो कि कैकेयी की दासी थी, की बुद्धि को फेर दिया। मन्थरा की सलाह से कैकेयी कोपभवन में चली गई। दशरथ जब मनाने आये तो कैकेयी ने उनसे वरदान मांगे कि भरत को राजा बनाया जाये और राम को चौदह वर्षों के लिये वनवास
में भेज दिया जाये। राम के साथ सीता और लक्ष्मण भी वन चले गये। ऋंगवेरपुर में निषादराज गुह ने तीनों की बहुत सेवा की। कुछ
आनाकानी करने के बाद केवट ने तीनों को गंगा नदी के पार उतारा| प्रयाग पहुँच कर राम ने भरद्वाज मुनि से भेंट की। वहाँ से राम यमुना स्नान करते हुए वाल्मीकि ऋषि के आश्रम पहुँचे। वाल्मीकि से हुई मन्त्रणा के अनुसार राम, सीता और लक्ष्मण चित्रकूट में निवास करने लगे। अयोध्या में पुत्र के वियोग के कारण दशरथ का स्वर्गवास हो गया। वशिष्ठ ने भरत और शत्रुघ्न को उनके ननिहाल से बुलवा लिया।
वापस आने पर भरत ने अपनी माता कैकेयी की, उसकी कुटिलता के लिये, बहुत भर्तस्ना की और गुरुजनों
के आज्ञानुसार दशरथ की अन्त्येष्टि क्रिया कर दिया। भरत ने अयोध्या के राज्य को अस्वीकार कर दिया
और राम को मना कर वापस लाने के लिये समस्त स्नेहीजनों के साथ चित्रकूट चले गये। कैकेयी को भी अपने किये पर अत्यंत
पश्चाताप हुआ। सीता के माता-पिता सुनयना एवं जनक भी चित्रकूट पहुँचे। भरत तथा अन्य सभी लोगों ने राम के वापस अयोध्या जाकर राज्य करने का प्रस्ताव
रखा जिसे कि राम ने, पिता की
आज्ञा पालन करने और रघुवंश की रीति निभाने के लिये, अमान्य कर दिया।
भरत अपने स्नेही जनों के साथ राम की
पादुका को साथ लेकर वापस अयोध्या आ गये। उन्होंने राम की पादुका को राज सिंहासन पर
विराजित कर दिया स्वयं नन्दिग्राम में निवास करने लगे।
रामचरितमानस
१५वीं शताब्दी के कवि गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा लिखा गया महाकाव्य है, रामचरितमानस
को गोस्वामी जी ने सात काण्डों में विभक्त किया है। इन सात काण्डों के नाम इस प्रकार
हैं |
Welcome to SanatanSanskriti Podcast, your spiritual sanctuary, where ancient wisdom meetsmodern devotion. I am Ashish P. Mishra, and I am thrilled to present an11-episode series dedicated to the divine glory of Devi Bhagwat Puran.This timeless scripture is a treasure trove of spiritual enlightenment,invoking the sacred presence of Devi Durga and celebrating the eternal power ofShakti.
If you are a devoteeof Maa Durga, someone who cherishes the essence of Navratri,or a seeker drawn to the rhythmic chants of shloks and mantras,this series is crafted for you. Whether you listen to Bhagwat Katha daily,meditate on divine energies, or simply seek inspiration in Hinduspirituality, Mahabhagwat Devi Puran will deepen yourconnection to the cosmic mother.
What is Devi BhagwatPuran?
The Devi BhagwatPuran is one of the most revered texts in Hindu scriptures. It is acomprehensive guide to understanding the cosmic energy personified by theDivine Mother, Devi Durga. Through enchanting stories, insightful Kathas,and spiritual philosophies, this scripture unravels the mysteries of creation,preservation, and destruction, all orchestrated by the goddess’s infiniteenergy.
Fromthe divine tales of Devi’s battles against demons like Mahishasura to thestories that emphasize devotion (bhakti), meditation (dhyan), andrighteous living (dharma), this Purana resonates deeply with everyseeker. It also highlights the importance of celebrating Navratri asa pathway to invoke the divine blessings of Maa Durga
Welcome to our podcast, where
ancient wisdom meets modern ears in an immersive exploration of the Shrimad
Bhagwat. Embark on a soul-stirring journey through this timeless scripture, a
treasure trove of spiritual enlightenment and divine narratives. Each episode
unlocks the profound teachings and captivating stories from the Bhagwat,
inviting listeners to discover profound insights, profound truths, and timeless
guidance for navigating life's journey. Join us as we delve into the depths of
devotion, wisdom, and the eternal quest for truth. Subscribe now to embark on a
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आइये
श्रीमद भागवत
कथा के प्राचीन ज्ञान के साथ एक रोमांचक यात्रा पर एक साथ निकलते हैं, जहाँ आध्यात्मिकता मनुष्य के अस्तित्व
के मूल स्वरूप के साथ मिलती है। हमारे पॉडकास्ट में आपका स्वागत है, जहाँ प्राचीन ज्ञान आधुनिक जीवन से मिलता
है और श्रीमद भागवत का रोमांचक अन्वेषण होता है। इस अद्वितीय शास्त्र के माध्यम
से आत्मिक जागरूकता और दिव्य कथाओं की खोज पर एक आत्मा को हिलाने वाली यात्रा
परमेरे साथ चलें । प्रत्येक एपिसोड भागवत के गहरे शिक्षाओं और रोमांचक कहानियों
को खोलता है, सुनने
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आइये आप और हम मिल कर आरम्भ करते हैं श्री
रामचरितमानस का पाठ |
जय श्री राम |
Ramcharitmanas
is an epic written by the 15th century poet Goswami Shri Tulsidas ji
Goswami ji has divided Ramcharitmanas into
seven Chapters . The names of these seven Chapters are as follows.