Explorez tous les épisodes du podcast Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18
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| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 78 | 31 janv. 2025 | 00:00:45 | |
यह श्लोक श्री भगवद गीता के 3.78 का अंश है। इसमें संजय कहते हैं: "जहाँ योगेश्वर श्री कृष्ण हैं और जहाँ अर्जुन जैसे धनुर्धर (बाण चलाने वाले) हैं, वहाँ निश्चित रूप से श्री (समृद्धि), विजय, ऐश्वर्य, स्थिरता और नीति (सिद्धांत) हैं। यह मेरी राय है।" संजय यह बताने का प्रयास कर रहे हैं कि जहां भगवान श्री कृष्ण और अर्जुन होते हैं, वहाँ हमेशा विजय और सफलता होती है। उनका यह कथन यह भी दर्शाता है कि जब धर्म, नीति और ज्ञान के प्रतीक भगवान श्री कृष्ण साथ होते हैं, तो वहाँ हर कार्य में सफलता और समृद्धि मिलती है। Here are some hashtags you can use for this shloka: #BhagavadGita #Sanjay #Krishna #Arjuna #DivineWisdom #Victory #Success #SpiritualAwakening #GitaShloka #DivineGuidance #Yoga #MoralVictory #SpiritualVictory #AncientPhilosophy #SacredText
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| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 77 | 30 janv. 2025 | 00:00:48 | |
यह श्लोक श्री भगवद गीता के 3.77 का अंश है। इसमें संजय धृतराष्ट्र से कहते हैं: "राजन! उस अद्भुत रूप को बार-बार स्मरण करते हुए, भगवान श्री कृष्ण के रूप की महिमा को याद करके मुझे अत्यधिक विस्मय और आनंद हो रहा है। बार-बार मुझे उस रूप का स्मरण करने पर हर्षित अनुभव हो रहा है।" संजय यहाँ भगवान श्री कृष्ण के दिव्य रूप की अद्भुतता और उसकी महिमा का वर्णन कर रहे हैं। उनके रूप की भव्यता और दिव्यता को स्मरण करते हुए संजय को विस्मय और संतोष प्राप्त हो रहा है। Here are some hashtags you can use for this shloka: #BhagavadGita #Sanjay #Krishna #DivineForm #SacredWisdom #SpiritualAwakening #AncientPhilosophy #GitaShloka #DivinePresence #SacredText #Yoga #Vismaya #DivineMajesty #InnerJoy #SpiritualJourney
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| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 76 | 30 janv. 2025 | 00:00:42 | |
यह श्लोक श्री भगवद गीता के 3.76 का अंश है। इसमें संजय धृतराष्ट्र से कहते हैं: "राजन! इस अद्भुत संवाद को बार-बार स्मरण करते हुए, मैं केशव और अर्जुन के बीच के इस पुण्यपूर्ण संवाद को सुनकर आनंदित हो रहा हूँ और बार-बार हर्षित हो रहा हूँ।" संजय यह व्यक्त कर रहे हैं कि भगवान श्री कृष्ण और अर्जुन के बीच का संवाद अत्यंत दिव्य और पुण्यकारी है, जिसे स्मरण करने से उन्हें खुशी और संतोष मिल रहा है। यह संवाद उनके लिए अत्यंत प्रेरणादायक है और वे इसे बार-बार याद करते हैं। Here are some hashtags you can use for this shloka: #BhagavadGita #Sanjay #Krishna #Arjuna #DivineDialogue #SacredWisdom #AncientPhilosophy #GitaShloka #SpiritualAwakening #InnerPeace #Yoga #Happiness #DivineTeachings #Punyakarma #SacredText #SpiritualJourney
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| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 75 | 29 janv. 2025 | 00:00:39 | |
यह श्लोक श्री भगवद गीता के 3.75 का अंश है। इसमें संजय कहते हैं: "मैंने इस अद्भुत और गूढ़ योग के ज्ञान को श्री कृष्ण से स्वयं सुनकर, उनके द्वारा बताए गए इस परम रहस्यमय उपदेश को व्यास जी की कृपा से सुना है।" संजय यहाँ यह बता रहे हैं कि उन्होंने यह दिव्य ज्ञान भगवान श्री कृष्ण से स्वयं सुना है, और यह ज्ञान उन्हें व्यास जी के आशीर्वाद से प्राप्त हुआ है। संजय भगवान श्री कृष्ण के उपदेशों की गहराई और महिमा को समझते हुए, इसका वर्णन करते हैं। Here are some hashtags you can use for this shloka: #BhagavadGita #Sanjay #Vyas #Krishna #DivineWisdom #Yoga #SpiritualTeachings #SacredKnowledge #AncientPhilosophy #GitaShloka #SelfRealization #YogaSutra #SpiritualAwakening #SacredText #InnerJourney
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| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 74 | 29 janv. 2025 | 00:00:37 | |
यह श्लोक श्री भगवद गीता के 3.74 का अंश है। इसमें संजय ने धृतराष्ट्र से कहा: "इस प्रकार मैं ने वासुदेव (भगवान श्री कृष्ण) और महात्मा अर्जुन के बीच का संवाद सुना, जो अत्यंत अद्भुत और रोमांचक था।" यह श्लोक संजय द्वारा वर्णित किया गया है, जो घटनाओं को धृतराष्ट्र को सुनाते हैं। वह इस संवाद को सुनकर आश्चर्यचकित होते हैं, क्योंकि वह अत्यधिक गहन और दिव्य था। संजय भगवान श्री कृष्ण और अर्जुन के संवाद को देखकर चकित हैं और उनके विचारों की गहराई से प्रभावित होते हैं। Here are some hashtags you can use for this shloka: #BhagavadGita #Sanjay #Krishna #Arjuna #DivineDialogue #SpiritualWisdom #AncientPhilosophy #EpicConversations #GitaShloka #InnerJourney #SacredTeachings #MysticalWisdom #Inspiration #SanatanDharma #SpiritualAwakening 4o mini | |||
| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 73 | 28 janv. 2025 | 00:00:42 | |
यह श्लोक श्री भगवद गीता के 3.73 का अंश है। इसमें अर्जुन भगवान श्री कृष्ण से कहते हैं: "हे अच्युत! मेरा मोह समाप्त हो चुका है, और स्मृति प्राप्त हुई है। आपके प्रसाद से मेरा संदेह दूर हो गया है। अब मैं स्थिर हूं और जो आप कहेंगे, वही करूंगा।" अर्जुन ने भगवान श्री कृष्ण के उपदेशों को पूरी तरह से समझ लिया है और उनका अज्ञान और भ्रम समाप्त हो चुका है। अब वह अपने संदेहों को छोड़कर श्री कृष्ण के निर्देशों का पालन करने के लिए तैयार हैं। Here are some hashtags you can use: #BhagavadGita #Arjuna #Krishna #DivineWisdom #SpiritualAwakening #SelfRealization #Moksha #GitaShloka #SanatanDharma #AncientPhilosophy #InnerPeace #Faith #SpiritualGrowth #SelfAwareness #Clarity #Guidance
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| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 72 | 28 janv. 2025 | 00:00:39 | |
यह श्लोक श्री भगवद गीता के 3.72 का अंश है। इसमें भगवान श्री कृष्ण अर्जुन से पूछते हैं: "क्या तुमने जो कुछ सुना है, उसे अपनी एकाग्रचित्तता से स्वीकार किया है? क्या तुम्हारा अज्ञान और मोह समाप्त हो गया है, हे धनंजय?" यह श्लोक अर्जुन के मन की स्थिति और उसकी समझ को स्पष्ट करने के लिए है। भगवान श्री कृष्ण अर्जुन से यह जानना चाहते हैं कि क्या वह उनके उपदेशों को अपने मन में ठीक से समझ पाया है और क्या उसका अज्ञान और भ्रम दूर हो चुका है। #BhagavadGita #Shloka #Hinduism #SpiritualWisdom #DivineTeachings #Krishna #Arjuna #AncientWisdom #Yoga #Meditation #IndianPhilosophy #Mindfulness #SelfAwareness #GitaVerse #Jñana #SelfRealization #InnerPeace | |||
| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 71 | 27 janv. 2025 | 00:00:42 | |
श्लोक का निहितार्थ (सारांश): Hashtags:
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| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 70 | 27 janv. 2025 | 00:00:44 | |
श्लोक का निहितार्थ (सारांश): Hashtags:
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| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 69 | 26 janv. 2025 | 00:00:40 | |
श्लोक का निहितार्थ (सारांश): Hashtags:
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| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 68 | 26 janv. 2025 | 00:00:37 | |
श्लोक का निहितार्थ (सारांश): Hashtags:
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| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 67 | 25 janv. 2025 | 00:00:45 | |
श्लोक का निहितार्थ (सारांश): Hashtags:
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| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 66 | 25 janv. 2025 | 00:00:38 | |
श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि सभी धर्मों और कर्तव्यों को छोड़कर केवल मेरी शरण में आओ। मैं तुम्हें सभी पापों से मुक्त कर दूंगा। चिंता मत करो। Hashtags:
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| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 65 | 24 janv. 2025 | 00:00:42 | |
भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को अपने प्रति पूर्ण समर्पण, भक्ति और प्रेम का मार्ग दिखाते हुए कहते हैं कि मन, भक्ति, और कर्म से मेरे प्रति निष्ठावान रहो। यदि तुम मेरा स्मरण करोगे, मेरी पूजा करोगे और मुझसे प्रेम करोगे, तो निश्चित ही तुम मुझे प्राप्त करोगे। यह मेरा वचन है, क्योंकि तुम मुझे प्रिय हो। Tags: #भगवद्गीता #श्रीकृष्ण #अर्जुन #भक्ति #योग #आत्मसमर्पण #हिंदूधर्म #प्रेरणा #अध्यात्म #शांति #ईश्वरभक्ति #कर्मयोग #मोक्ष #ज्ञान #जीवनसिद्धांत #भक्तियोग #गीताश्लोक #सनातनधर्म | |||
| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 64 | 24 janv. 2025 | 00:00:37 | |
श्लोक: सर्वगुह्यतमं भूय: शृणु मे परमं वच: | इष्टोऽसि मे दृढमिति ततो वक्ष्यामि ते हितम् || 64|| यह श्लोक भगवद्गीता (अध्याय 18, श्लोक 64) का है।
यह श्लोक भगवान के दिव्य प्रेम और करुणा का प्रतीक है। यह ज्ञान, भक्ति और आत्म-समर्पण के महत्व को प्रकट करता है, जो जीवन को मोक्ष और शांति की ओर ले जाता है। #BhagavadGita #SpiritualWisdom #DivineLove #KarmaYoga #BhaktiYoga #KrishnaArjuna #SelfRealization #HinduPhilosophy #Moksha #BhagavadGitaQuotes भगवद्गीता, श्रीकृष्ण, आध्यात्मिकता, भक्ति योग, कर्म योग, मोक्ष, अर्जुन, हिंदू दर्शन, शांति और कल्याण, प्रेरणादायक उद्धरण | |||
| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 63 | 13 janv. 2025 | 00:00:38 | |
जय श्री कृष्णा! 🙏 श्री भगवद गीता के 18वें अध्याय के 63वें श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को उनके सभी प्रश्नों का उत्तर देने के बाद आत्मनिर्णय का मार्ग प्रदान कर रहे हैं। इस श्लोक में उन्होंने ज्ञान के रहस्यों को उजागर किया और अर्जुन को स्वतंत्र निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया। इस श्लोक में हम जानेंगे: भगवान द्वारा अर्जुन को दिया गया परम ज्ञान। आत्मनिर्णय और स्वतंत्रता का महत्व। जीवन में सही चुनाव करने का महत्व। भगवद गीता का यह संदेश हर व्यक्ति को अपनी क्षमता और विवेक से जीवन के निर्णय लेने की प्रेरणा देता है। वीडियो को अंत तक देखें और इस अमूल्य ज्ञान को अपनाएं। #Hashtags: #BhagavadGita #Chapter18 #GeetaSlok #DivineWisdom #KrishnaTeachings #SelfDecision #SpiritualGrowth #GeetaGyan #ShlokExplained #LifeChoices #Bhakti #Arjuna Tags (Comma-separated): Bhagavad Gita, Chapter 18, Slok 63, Krishna teachings, Divine Wisdom, Spiritual Freedom, Hindu Scriptures, Geeta Saar, Self Decision, Bhagavad Gita Explanation, Geeta in Hindi, Param Gyaan, Shri Krishna, Life Choices, Spirituality, Self Determination, Geeta Shlok Meaning | |||
| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 62 | 26 déc. 2024 | 00:00:33 | |
तमेव शरणं गच्छ - भगवद गीता अध्याय 18 श्लोक 62 | Shrimad Bhagavad Gita 18.62 Description: Hashtags: Tags:
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| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 61 | 25 déc. 2024 | 00:00:36 | |
ईश्वरः सर्वभूतानां - भगवद गीता अध्याय 18 श्लोक 61 | Shrimad Bhagavad Gita 18.61 Description: Hashtags: Tags:
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| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 60 | 24 déc. 2024 | 00:00:34 | |
स्वभावजेन कौन्तेय - भगवद गीता अध्याय 18 श्लोक 60 | Shrimad Bhagavad Gita 18.60 Description: Hashtags: Tags:
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| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 59 | 23 déc. 2024 | 00:00:39 | |
अहम् का मोह और प्रकृति का प्रभाव - भगवद गीता अध्याय 18 श्लोक 59 | Shrimad Bhagavad Gita 18.59 Description: Hashtags: Tags:
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| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 58 | 22 déc. 2024 | 00:00:42 | |
भगवान श्रीकृष्ण का उपदेश | श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 श्लोक 58 Description: Tags: Hashtags:
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| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 57 | 21 déc. 2024 | 00:00:40 | |
भगवद्भक्ति में चित्त को स्थिर करो | श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 श्लोक 57 Description: Tags: Hashtags:
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| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 56 | 20 déc. 2024 | 00:00:35 | |
भगवद्कृपा से शाश्वत पद की प्राप्ति | श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 श्लोक 56 Description: Tags: Hashtags:
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| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 55 | 19 déc. 2024 | 00:00:38 | |
भक्ति से भगवान की प्राप्ति | श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 श्लोक 55 Description: Tags: Hashtags:
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| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 54 | 18 déc. 2024 | 00:00:47 | |
आध्यात्मिक शांति की स्थिति | श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 श्लोक 54 Description: Tags: Hashtags:
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| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 53 | 17 déc. 2024 | 00:00:47 | |
अहंकार और क्रोध का त्याग | श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 श्लोक 53 Description: Tags: Hashtags:
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| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 52 | 16 déc. 2024 | 00:00:46 | |
ध्यान योग और वैराग्य का महत्व | श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 श्लोक 52 Description: Tags: Hashtags:
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| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 51 | 15 déc. 2024 | 00:00:56 | |
आत्मसंयम और शुद्ध बुद्धि | श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 श्लोक 51 Description: Tags: Hashtags:
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| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 50 | 14 déc. 2024 | 00:00:44 | |
ज्ञान की परम निष्ठा | श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 श्लोक 50 Description: Tags: Hashtags:
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| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 49 | 13 déc. 2024 | 00:00:51 | |
असक्त बुद्धि से नैष्कर्म्य सिद्धि | श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 श्लोक 49 Description: Tags: Hashtags:
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| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 48 | 12 déc. 2024 | 00:00:45 | |
सहजं कर्म त्याग न करें | श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 श्लोक 48 Description: Tags: Hashtags:
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| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 47 | 27 nov. 2024 | 00:00:42 | |
भगवद गीता के अध्याय 18, श्लोक 47 में श्रीकृष्ण कहते हैं कि अपने स्वभाव के अनुसार निर्धारित धर्म और कर्म करना ही सर्वोत्तम है, भले ही वह दोषपूर्ण क्यों न हो। दूसरे के धर्म का पालन, चाहे वह कितना भी उत्तम हो, अनिष्टकारी हो सकता है। अपने स्वधर्म का पालन करने से मनुष्य पाप में नहीं फंसता। यह श्लोक व्यक्ति को अपनी प्रकृति के अनुसार कर्म करते हुए जीवन जीने की प्रेरणा देता है। Hashtags:
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| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 46 | 27 nov. 2024 | 00:00:44 | |
भगवद गीता के अध्याय 18, श्लोक 46 में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि जिस परमात्मा से सभी प्राणियों की उत्पत्ति होती है और जो संपूर्ण सृष्टि में व्याप्त है, मनुष्य अपने स्वकर्म के माध्यम से उसकी आराधना करते हुए सिद्धि प्राप्त कर सकता है। यह श्लोक कर्म, भक्ति और आत्मसिद्धि का गहरा संदेश देता है। Hashtags:
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| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 45 | 27 nov. 2024 | 00:00:44 | |
भगवद गीता के अध्याय 18, श्लोक 45 में भगवान श्रीकृष्ण बताते हैं कि मनुष्य अपने स्वभाव के अनुसार किए गए कर्मों में रत रहकर आत्मसिद्धि प्राप्त कर सकता है। प्रत्येक व्यक्ति का स्वकर्म उसके गुणों और स्वभाव से निर्धारित होता है। यह श्लोक जीवन में स्वधर्म और कर्म की महत्ता को उजागर करता है। Hashtags:
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| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 44 | 27 nov. 2024 | 00:00:34 | |
भगवद गीता के अध्याय 18, श्लोक 44 में भगवान श्रीकृष्ण वैश्य और शूद्र के स्वभावजन्य कर्मों का वर्णन करते हैं। वैश्य का स्वाभाविक कर्म कृषि, गोरक्षा और वाणिज्य है, जबकि शूद्र का कर्म सेवा और परोपकार करना है। यह श्लोक समाज में सभी वर्गों के कार्यों और जिम्मेदारियों की महत्ता को दर्शाता है। Hashtags:
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| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 43 | 27 nov. 2024 | 00:00:37 | |
भगवद गीता के अध्याय 18, श्लोक 43 में भगवान श्रीकृष्ण क्षत्रिय के स्वभावजन्य कर्मों का वर्णन करते हैं। इसमें शौर्य (वीरता), तेज (तेजस्विता), धृति (धैर्य), दक्षता (कुशलता), युद्ध में न पलायन करना, दान देना और नेतृत्व गुण शामिल हैं। यह श्लोक क्षत्रिय के धर्म और समाज में उनकी भूमिका को स्पष्ट करता है। Hashtags:
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| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 42 | 27 nov. 2024 | 00:00:34 | |
भगवद गीता के अध्याय 18, श्लोक 42 में भगवान श्रीकृष्ण बताते हैं कि ब्राह्मण के स्वाभाविक कर्म क्या होते हैं। इनमें शम (मन की शांति), दम (इंद्रियों पर नियंत्रण), तप (साधना), शौच (पवित्रता), क्षमा (दया), आर्जव (सत्यनिष्ठा), ज्ञान (आध्यात्मिक ज्ञान), विज्ञान (प्रायोगिक ज्ञान), और आस्तिकता (आध्यात्मिक विश्वास) शामिल हैं। यह श्लोक आत्मा की शुद्धि और समाज के कल्याण हेतु ब्राह्मण के धर्म का वर्णन करता है। Hashtags:
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| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 41 | 27 nov. 2024 | 00:00:36 | |
भगवद गीता के अध्याय 18 के श्लोक 41 में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को बताते हैं कि ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, और शूद्र के कर्म उनके स्वभाव और प्रकृति से उत्पन्न गुणों के अनुसार विभाजित हैं। यह श्लोक समाज में विभिन्न भूमिकाओं की प्राकृतिक व्यवस्था और उनके महत्व को उजागर करता है। Hashtags:
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| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 40 | 27 nov. 2024 | 00:00:51 | |
भगवद गीता के अध्याय 18 के श्लोक 40 में भगवान श्रीकृष्ण बताते हैं कि पृथ्वी, आकाश, या देवताओं में ऐसा कोई सत्त्व नहीं है जो प्रकृति के तीन गुणों (सत्त्व, रजस, और तमस) से मुक्त हो। यह श्लोक जीवन के सार्वभौमिक नियमों को समझने का एक अनमोल संदेश देता है, जो हर जीव के अस्तित्व में निहित है। Hashtags:
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| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 39 | 23 nov. 2024 | 00:00:42 | |
श्री भगवद गीता के अध्याय 18, श्लोक 39 में भगवान श्रीकृष्ण तामस सुख का वर्णन करते हैं। यह सुख आरंभ और परिणाम दोनों में आत्मा को मोह में डालने वाला होता है। यह आलस्य, प्रमाद और अज्ञान से उत्पन्न होता है और व्यक्ति को निष्क्रिय और भ्रमित करता है। जानें तामस सुख के प्रभाव और इससे बचने के उपाय। Tags: Hashtags:
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| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 38 | 23 nov. 2024 | 00:00:42 | |
श्री भगवद गीता के अध्याय 18, श्लोक 38 में भगवान श्रीकृष्ण राजस सुख का वर्णन करते हैं। यह सुख इंद्रियों और विषयों के संयोग से उत्पन्न होता है, जो प्रारंभ में अमृत जैसा प्रतीत होता है, लेकिन अंततः विष समान कष्टदायक हो जाता है। इस श्लोक में बताया गया है कि ऐसा सुख क्षणिक और अस्थायी होता है। जानें राजस सुख की वास्तविकता और इसके प्रभाव। Tags: Hashtags:
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| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 37 | 23 nov. 2024 | 00:00:44 | |
श्री भगवद गीता के अध्याय 18, श्लोक 37 में भगवान श्रीकृष्ण सात्त्विक सुख का वर्णन करते हैं। यह सुख प्रारंभ में कठिनाई भरा होता है, जैसे विष, लेकिन परिणामस्वरूप अमृत के समान मधुर होता है। यह सुख आत्मा और बुद्धि की प्रसन्नता से उत्पन्न होता है। इस श्लोक के माध्यम से जानें, सच्चे और स्थायी सुख की पहचान। Tags: Hashtags:
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| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 36 | 23 nov. 2024 | 00:00:45 | |
श्री भगवद गीता के अध्याय 18, श्लोक 36 में भगवान श्रीकृष्ण सुख के तीन प्रकारों का वर्णन करते हैं। वे अर्जुन से कहते हैं कि जो सुख अभ्यास से प्राप्त होता है और जिससे अंततः सभी दुख समाप्त हो जाते हैं, उसे समझने का प्रयास करो। इस श्लोक के माध्यम से जानें, जीवन में स्थायी सुख की प्राप्ति का मार्ग। #भगवदगीता #गीता_श्लोक #सात्त्विकसुख #कृष्ण_उपदेश #आध्यात्मिकजीवन #दुःख_का_अंत #आत्मिकशांति #गीता_ज्ञान #जीवन_संदेश | |||
| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 35 | 23 nov. 2024 | 00:00:38 | |
श्री भगवद गीता के अध्याय 18, श्लोक 35 में भगवान श्रीकृष्ण तामसी धृति का वर्णन करते हैं। यह धृति व्यक्ति को स्वप्न, भय, शोक, विषाद, और मद के प्रभाव में रखती है। ऐसी धृति आलस्य और प्रमाद से प्रेरित होती है, जो जीवन में उन्नति के मार्ग में बाधक बनती है। जानें, तामसी धृति के लक्षण और इसे दूर करने के उपाय इस श्लोक के माध्यम से। #भगवदगीता #गीता_श्लोक #तामसीधृति #आलस्य #विषाद #कृष्ण_उपदेश #गीता_ज्ञान #आध्यात्मिकजीवन #धृति_के_प्रकार #जीवन_संदेश | |||
| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 34 | 23 nov. 2024 | 00:00:37 | |
श्री भगवद गीता के अध्याय 18, श्लोक 34 में भगवान श्रीकृष्ण ने राजसी धृति का वर्णन किया है। यह धृति धर्म, काम, और अर्थ के प्रति लगाव और फल की आकांक्षा से प्रेरित होती है। इसमें व्यक्ति अपने कार्यों में दृढ़ता तो रखता है, लेकिन उसका लक्ष्य सांसारिक उपलब्धियां और इच्छाओं की पूर्ति होता है। जानें, राजसी धृति के लक्षण और इसके प्रभाव इस श्लोक के माध्यम से। #भगवदगीता #गीता_श्लोक #राजसीधृति #कर्म #जीवन_लक्ष्य #कृष्ण_उपदेश #गीता_ज्ञान #आध्यात्मिक_जीवन #धर्म_काम_अर्थ | |||
| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 33 | 23 nov. 2024 | 00:00:41 | |
श्री भगवद गीता के अध्याय 18, श्लोक 33 में सात्त्विक धृति का वर्णन किया गया है। भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को बताते हैं कि जो धृति (दृढ़ता) योग और अनुशासन के माध्यम से मन, प्राण, और इंद्रियों की गतिविधियों को स्थिर और अविचलित बनाए रखती है, उसे सात्त्विकी धृति कहा जाता है। यह धृति व्यक्ति को आत्मज्ञान और परम शांति के मार्ग पर अग्रसर करती है। इस श्लोक के माध्यम से जानें सात्त्विक धृति के महत्व और गुण। #भगवदगीता #गीता_श्लोक #सात्त्विकीधृति #मन_संयम #योग #कृष्णउपदेश #आध्यात्मिक_ज्ञान #गीता_ज्ञान #जीवन_मार्गदर्शन | |||
| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 32 | 23 nov. 2024 | 00:00:45 | |
श्री भगवद गीता के अध्याय 18, श्लोक 32 में भगवान श्रीकृष्ण तामसी बुद्धि की व्याख्या करते हैं। इस श्लोक में बताया गया है कि जो बुद्धि अधर्म को धर्म और धर्म को अधर्म समझती है, और जो सभी चीजों को विपरीत रूप से देखती है, वह तामसिक बुद्धि कहलाती है। यह अज्ञान और मोह से ग्रसित होती है। जानें तामसी बुद्धि के लक्षण और इसे समझने का गूढ़ रहस्य। #भगवदगीता #गीता_श्लोक #तामसीबुद्धि #अधर्म_धर्म #हिंदूधर्म #कृष्णउपदेश #गीता_ज्ञान #तामसिकता | |||
| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 31 | 19 nov. 2024 | 00:00:46 | |
भगवद गीता के अध्याय 18 के श्लोक 31 में भगवान श्रीकृष्ण राजसी बुद्धि की विशेषताओं का वर्णन करते हैं। राजसी बुद्धि वह है जो धर्म और अधर्म, कार्य और अकार्य को सही तरीके से नहीं पहचान पाती। यह बुद्धि भ्रमित होती है और अधूरी जानकारी के आधार पर निर्णय लेती है। ऐसे व्यक्तियों का जीवन अक्सर मोह, अहंकार और लालच से प्रभावित होता है। #BhagavadGita #GeetaChapter18 #Shlok31 #RajasikBuddhi #KrishnaUpdesh #SpiritualWisdom #GeetaHindi #HinduPhilosophy #LifeGuidance #GeetaKnowledge #SelfAwareness | |||
| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 30 | 19 nov. 2024 | 00:00:54 | |
श्रीमद्भगवद गीता के अध्याय 18 के श्लोक 30 में भगवान श्रीकृष्ण सात्त्विक बुद्धि की विशेषताओं का वर्णन करते हैं। यह बुद्धि हमें प्रवृत्ति (सक्रियता) और निवृत्ति (त्याग), सही और गलत, भय और अभय, तथा बंधन और मोक्ष के सही स्वरूप को समझने में सक्षम बनाती है। इस ज्ञान से हम अपने जीवन में सही निर्णय लेने और आत्मा की उन्नति का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं। #BhagavadGita #GeetaChapter18 #Shlok30 #SattvikBuddhi #SpiritualKnowledge #KrishnaUpdesh #LifeGuidance #GeetaInHindi #HinduPhilosophy #SelfAwareness #PathToMoksha | |||
| Shri Bhagavad Gita Chapter 18 | श्री भगवद गीता अध्याय 18 | श्लोक 29 | 19 nov. 2024 | 00:00:42 | |
श्रीमद्भगवद गीता के अध्याय 18 के श्लोक 29 में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को तीन प्रकार की बुद्धि और धृति (स्थिरता) का विस्तार से वर्णन करने वाले हैं। यह श्लोक जीवन में सही निर्णय और धैर्य की भूमिका को समझाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस ज्ञान के माध्यम से हम सत्व, रजस और तमस गुणों के आधार पर अपने मन और विचारों को नियंत्रित करना सीख सकते हैं। #BhagavadGita #GeetaChapter18 #Shlok29 #Buddhi #Dhriti #KrishnaUpdesh #SpiritualWisdom #LifeGuidance #GeetaInHindi #HinduPhilosophy | |||