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Explorez tous les épisodes du podcast Sampurn Shiv Puran

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TitreDateDurée
261. Vayviya Samhita (Uttar Khand) Adhyay - 41 / वायवीय संहिता (उत्तरार्द्ध) - इकतालीसवां अध्याय25 Aug 202300:11:30

"भगवान् नन्दी का वहाँ आना और दृष्टिपात मात्र से पाशछेदन एवं ज्ञानयोग का उपदेश कर के चला जाना, शिवपुराण की महिमा तथा ग्रन्थ का उपसंहार"

260. Vayviya Samhita (Uttar Khand) Adhyay - 60 / वायवीय संहिता (उत्तरार्द्ध) - चालीसवां अध्याय 25 Aug 202300:10:10

"वायुदेव का अन्तर्धान, ऋषियों का सरस्वती में अवभृथ- स्नान और काशी में दिव्य तेज का दर्शन कर के ब्रह्माजी के पास जाना, ब्रह्मा जी का उन्हें सिद्धि-प्राप्ति की सूचना देकर मेरु के कुमार-शिखर पर भेजना"

251. Vayviya Samhita (Uttar Khand) Adhyay - 26 & 27 / वायवीय संहिता (उत्तरार्द्ध) - "छब्बीसवां एवं सत्ताईसवां अध्याय "25 Aug 202300:21:00

"पंचाक्षर-मन्त्र के जप तथा भगवान् शिव के भजन-पूजन की महिमा, अग्निकार्य के लिये कुण्ड और वेदी आदि के संस्कार, शिवाग्नि की स्थापना और उसके संस्कार, होम, पूर्णाहुति, भस्म के संग्रह एवं रक्षण की विधि तथा हवनान्त में किये जाने वाले कृत्य का वर्णन"

161. Koti Rudra Samhita; Adhyay 15 & 16 / कोटिरुद्र संहिता; "पंद्रहवाँ एवं सोलहवाँ अध्याय"14 Aug 202300:07:25

"मल्लिकार्जुन और महाकाल नामक ज्योतिर्लिंगों के
आविर्भाव की कथा तथा उनकी महिमा"

160. Koti Rudra Samhita; Adhyay 8 - 14 / कोटिरुद्र संहिता; आठवें से लेकर चौदहवाँ अध्याय14 Aug 202300:07:54

"प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ के प्रादुर्भाव की कथा और उसकी महिमा"

159. Koti Rudra Samhita; Adhyay 4 - 7 / कोटिरुद्र संहिता; चौथा, पाचवाँ, छठा एवं सातवाँ अध्याय14 Aug 202300:06:14

"ऋषिका पर भगवान् शिव की कृपा, एक असुर से उसके धर्म की रक्षा करके उसके आश्रम में ‘नन्दिकेश’ नाम से निवास करना और वर्ष में एक दिन गंगा का भी वहाँ आना"

158. Koti Rudra Samhita; Adhyay 2 & 3 / कोटिरुद्र संहिता; "दूसरा एवं तीसरा अध्याय"14 Aug 202300:04:01

"काशी आदिके विभिन्न लिंगोंका वर्णन तथा अत्रीश्वर की उत्पत्ति के प्रसंग में गंगा और शिव के अत्रि के तपोवन में नित्य निवास करने की कथा"

157. Koti Rudra Samhita; Adhyay 1 / कोटिरुद्र संहिता; पहला अध्याय14 Aug 202300:08:56

"द्वादश ज्योतिर्लिंगों तथा उनके उपलिंगो का वर्णन एवं उनके दर्शन पूजन की महिमा"

156. Shat Rudra Samhita; - Adhyay 42 / शतरुद्र सहिंता; 'बयालीसवां अध्याय '09 Aug 202300:11:09

"शिवजी के द्वादश ज्योतिर्लिगावतारों का सविस्तार वर्णन"

155. Shat Rudra Samhita; - Adhyay 40 & 41 / शतरुद्र सहिंता; 'चालीसवां एवं इकतालीसवां अध्याय'09 Aug 202300:18:16

"अर्जुन और शिवदूत का वार्तालाप, किरातवेषधारी शिवजी के साथ अर्जुन का युद्ध, पहचानने पर अर्जुन द्वारा शिव-स्तुति, शिवजी का अर्जुन को वरदान देकर अन्तर्धान होना, अर्जुन का आश्रम पर लौट कर भाइयों से मिलना, श्रीकृष्ण का अर्जुन से मिलने के लिये वहाँ पधारना"

154. Shat Rudra Samhita; - Adhyay 39 / शतरुद्र सहिंता; उन्तालीसवां अध्याय09 Aug 202300:09:44

"किरातावतार के प्रसंग में मूक नामक दैत्य का शूकर रूप धारण करके अर्जुन के पास आना, शिवजी का किरात वेष में प्रकट होना, और अर्जुन तथा किरात वेषधारी शिव द्वारा उस दैत्य का वध"

153. Shat Rudra Samhita; - Adhyay 33 - 38 / शतरुद्र सहिंता; 'तैतीसवें अध्याय से लेकर अड़तीसवें अध्याय तक' 09 Aug 202300:09:00

"शिवजी के किरातावतार के प्रसंग में श्रीकृष्ण द्वारा द्वैत-वन में दुर्वासा के शापसे पाण्डवों की रक्षा, व्यासजी का अर्जुन को शक्र-विद्या और पार्थिव पूजन की विधि बता कर तप के लिये सम्मति देना, अर्जुन का इन्द्र-कील पर्वत पर तप, इन्द्र का आगमन और अर्जुन को वरदान, अर्जुन का शिवजी के उद्देश्य से पुनः तप में प्रवृत्त होना"

152. Shat Rudra Samhita; - Adhyay 32 / शतरुद्र सहिंता; बत्तीसवां अध्याय09 Aug 202300:06:12

"शिव के सुरेश्वरावतार की कथा, उपमन्यु की तपस्या, और उन्हें उत्तम वर की प्राप्ति"

250. Vayviya Samhita (Uttar Khand) Adhyay - 25 / वायवीय संहिता (उत्तरार्द्ध) - पच्चीसवाँ अध्याय 24 Aug 202300:10:21

"शिवपूजा की विशेष विधि तथा शिव-भक्ति की महिमा"

151. Shat Rudra Samhita; - Adhyay 31 / शतरुद्र सहिंता; 'इकत्तीसवां अध्याय'09 Aug 202300:11:18

"भगवान् शिव के भिक्षुवर्यावतार की कथा राजकुमार और द्विजकुमार पर कृपा"

150. Shat Rudra Samhita; - Adhyay 30 / शतरुद्र सहिंता; 'तीसवां अध्याय' 09 Aug 202300:05:53

"भगवान शिव के अवधूतेश्वर अवतार की कथा और उसकी महिमा का वर्णन"

149. Shat Rudra Samhita; - Adhyay 29 / शतरुद्र सहिंता; 'उन्तीसवां अध्याय '09 Aug 202300:08:21

"भगवान शिव के कृष्ण दर्शन नामक अवतार की कथा"

148. Shat Rudra Samhita; - Adhyay 28 / शतरुद्र सहिंता; 'अठ्ठाईसवां अध्याय' 09 Aug 202300:06:14

"भगवान शिव का यतिनाथ एवम हंस नामक अवतार"

147. Shat Rudra Samhita; - Adhyay 26 & 27 / शतरुद्र सहिंता; 'छब्बीसवां एवं सत्ताईसवां अध्याय '09 Aug 202300:10:02

"भगवान् शिव के द्विजेश्वरावतार की कथा-राजा भद्रायु तथा रानी कीर्तिमालिनी की धार्मिक दृढ़ता की परीक्षा"

146. Shat Rudra Samhita; - Adhyay 21 - 25 / शतरुद्र सहिंता; 'अध्याय इक्कीस से लेकर अध्याय पच्चीस तक' 09 Aug 202300:11:12

"शिवजी के पिप्पलाद-अवतार के प्रसंग में देवताओं की दधीचि मुनि से अस्थि याचना, दधीचि का शरीरत्याग, वज्र-निर्माण तथा उसके द्वारा वृत्रासुर का वध, सुवर्चा का देवताओं को शाप, पिप्पलाद का जन्म और उनका विस्तृत वृत्तान्त"

145. Shat Rudra Samhita; - Adhyay 19 & 20 / शतरुद्र सहिंता; "उन्नीसवाँ एवं बीसवाँ अध्याय"09 Aug 202300:05:41

"शिवजी के दुर्वासावतार एवं हनुमदावतार का वर्णन"

144. Shat Rudra Samhita; - Adhyay 16 - 18 / शतरुद्र सहिंता; "सोलहवें अध्याय से लेकर अठारवें अध्याय तक"07 Aug 202300:08:41

"शिवजी के महाकाल आदि दस अवतारों का तथा गयारह रुद्र अवतारों का वर्णन"

143. Shat Rudra Samhita; - Adhyay 14 & 15 / शतरुद्र सहिंता; ""चौदहवाँ एवं पंद्रहवाँ अध्याय"07 Aug 202300:16:22

"शिवजी का शुचिष्मती के गर्भ से प्राकट्य, ब्रह्मा द्वारा बालक का संस्कार कर के ‘गृहपति’ नाम रखा जाना, नारद जी द्वारा उसका भविष्य-कथन, पिता की आज्ञा से गृहपति का काशी में जाकर तप करना, इन्द्र का वर देने के लिये प्रकट होना, गृहपति का उन्हें ठुकराना, शिवजी का प्रकट होकर उन्हें वरदान देकर दिक्पाल पद प्रदान करना तथा अग्नीश्वरलिंग और अग्नि का माहात्म्य"

142. Shat Rudra Samhita; - Adhyay 8 - 13 / शतरुद्र सहिंता; "आठवें अध्याय से लेकर तेरहवें अध्याय तक "07 Aug 202300:11:28

"काल-भैरव का माहात्म्य, विश्वानर की तपस्या और शिव जी का प्रसन्न होकर उनकी पत्नी शुचिष्पती के गर्भ से उनके पुत्र रूप में प्रकट होने का उन्हें वरदान देना"

249. Vayviya Samhita (Uttar Khand) Adhyay - 24 / वायवीय संहिता (उत्तरार्द्ध) - चौबीसवाँ अध्याय 24 Aug 202300:14:55

"शिवपूजन-की विधि"

141. Shat Rudra Samhita; - Adhyay 7 / शतरुद्र सहिंता; "सातवाँ अध्याय"07 Aug 202300:08:55

"नंदीश्वर के जन्म,वरप्राप्ति,अभिषेक और विवाह का वर्णन"

140. Shat Rudra Samhita; - Adhyay 6 / शतरुद्र सहिंता; "छठा अध्याय"07 Aug 202300:06:54

"नंदीश्वर अवतार का वर्णन"

139. Shat Rudra Samhita; - Adhyay 5 / शतरुद्र सहिंता; "पाचवाँ अध्याय"07 Aug 202300:10:14

"शिवजी द्वारा दसवें से लेकर अठाइसवें योगेश्वरतारों का वर्णन"

138. Shat Rudra Samhita; - Adhyay 4 / शतरुद्र सहिंता; चौथा अध्याय06 Aug 202300:07:45

"वाराह कल्प में होने वाले शिव जी के प्रथम अवतार से लेकर नवम ऋषभ अवतार तक का वर्णन"

137. Shat Rudra Samhita; - Adhyay 2 & 3 / शतरुद्र सहिंता; "दूसरा एवं तीसरा अध्याय"06 Aug 202300:08:41

"शिव जी की अष्टमूर्तियों का तथा अर्धनारीश्वर रूप का सविस्तार वर्णन"

136. Shat Rudra Samhita; - Adhyay 1 / शतरुद्र सहिंता; पहला अध्याय06 Aug 202300:10:36

"शिवजीके सद्योजात, वामदेव, तत्पुरुष, अघोर और ईशान नामक पाँच अवतारोंका वर्णन"

135. Rudra Samhita; Yuddh Khand - Adhyay 59 / श्रीरुद्र संहिता (युद्ध-पंचम खण्ड) उनसठवाँ अध्याय 29 Jul 202300:04:51

"विदल और उत्पल नामक दैत्योंका पार्वती पर मोहित होना और पार्वती का कन्दुक प्रहारद्वारा उनका काम तमाम करना, कन्दुकेश्वर की स्थापना और उनकी महिमा"

134. Rudra Samhita; Yuddh Khand - Adhyay 58 / श्रीरुद्र संहिता (युद्ध-पंचम खण्ड) अट्ठावनवाँ अध्याय 28 Jul 202300:04:19

"दुन्दुभिनिह्हाद नामक दैत्य का व्याघ्ररूप से शिवभक्त पर आक्रमण करने का विचार और शिव द्वारा उसका वध"

133. Rudra Samhita; Yuddh Khand - Adhyay 57 / श्रीरुद्र संहिता (युद्ध-पंचम खण्ड) सत्तानवाँ अध्याय28 Jul 202300:04:07

"गजासुर की तपस्या, वर-प्राप्ति और उसका अत्याचार, शिव द्वारा उसका वध,उस की प्रार्थना से शिव का उसका चर्म धारण करना और ‘कृत्तिवासा’ नाम से विख्यात होना तथा कृत्तिवासेश्वरलिंग की स्थापना करना"

132. Rudra Samhita; Yuddh Khand - Adhyay 55 - 56 / श्रीरुद्र संहिता (युद्ध-पंचम खण्ड) "पचपनवाँ एवं छप्पनवाँ अध्याय "27 Jul 202300:08:22

"श्रीकृष्ण द्वारा बाण की भुजाओं का काटा जाना, सिर काटने के लिये उद्यत हुए श्रीकृष्ण को शिव का रोकना और उन्हें समझाना, श्रीकृष्ण का परिवार समेत द्वारका को लौट जाना, बाण का ताण्डव नृत्य द्वारा शिव को प्रसन्न करना, शिव द्वारा उसे अन्यान्य वरदानों के साथ महाकालत्व की प्राप्ति"

248. Vayviya Samhita (Uttar Khand) Adhyay - 21, 22 & 23 / वायवीय संहिता (उत्तरार्द्ध) "इक्कीसवाँ, बाइसवाँ एवं तेइसवाँ अध्याय "24 Aug 202300:05:41

"अन्तर्याग अथवा मानसिक पूजाविधि का वर्णन"

131. Rudra Samhita; Yuddh Khand - Adhyay 51 - 54 / श्रीरुद्र संहिता (युद्ध-पंचम खण्ड) इक्यावनवें अध्याय से लेकर चौवनवें अध्याय तक27 Jul 202300:22:18

"बाणासुर की तपस्या और उसे शिव द्वारा वर प्राप्ति, शिव का गणों और पुत्रो सहित उसके नगर में निवास करना, बाणपुत्री उषा का रात के समय स्वप्न में अनिरुद्ध के साथ मिलन, चित्रलेखा द्वारा अनिरुद्ध का द्वारका से अपहरण, बाण का अनिरुद्ध को नागपाश में बांधना , दुर्गा के स्तवन से अनिरुद्ध का बंधन मुक्त होना, नारद द्वारा समाचार पाकर श्री कृष्ण की शोणितपुर पर चढ़ाई, शिव के साथ उनका घोर युद्ध , शिव की आज्ञा से श्री कृष्ण का उन्हें जृम्भणास्त्र से मोहित करके बाण की सेना का संहार"

130. Rudra Samhita; Yuddh Khand - Adhyay 50 / श्रीरुद्र संहिता (युद्ध-पंचम खण्ड) पचासवाँ अध्याय 26 Jul 202300:12:35

"शुक्राचार्य की घोर तपस्या और इनका शिवजी को चित्तरल्न अर्पण करना तथा अष्टमूत्त्यष्टक-स्तोत्र द्वारा उनका स्तवन करना, शिवजी का प्रसन्न होकर उन्हें मृत-संजीवनी विद्या तथा अन्यान्य वर प्रदान करना"

129. Rudra Samhita; Yuddh Khand - Adhyay 47 - 49 / श्रीरुद्र संहिता (युद्ध-पंचम खण्ड) सैंतालीसवें अध्याय से लेकर उनचासवें अध्याय तक26 Jul 202300:30:11

नन्दीश्वर द्वारा शुक्राचार्य का अपहरण और शिव द्वारा उनका निगला जाना, सौ वर्ष के बाद शुक्र का शिवलिंग के रास्ते बाहर निकलना, शिव द्वारा उनका ‘शुक्र’ नाम रखा जाना, शुक्र द्वारा जपे गये मृत्युंजय- मन्त्र और शिवाष्टोत्तर-शतनामस्तोत्र का वर्णन, शिव द्वारा अन्धक को वर-प्रदान"

128. Rudra Samhita; Yuddh Khand - Adhyay 44 - 46 / श्रीरुद्र संहिता (युद्ध-पंचम खण्ड) चवालीसवें अध्याय से लेकर छियालीसवें अध्याय तक25 Jul 202300:19:48

"भाइयों के उपालम्भ से अन्धक का तप करना और वर पाकर त्रिलोकी को जीत कर स्वेच्छाचार में प्रवृत्त होना, उसके मनत्रियों द्वारा शिव-परिवार का वर्णन, पार्वती के सौन्दर्य पर मोहित होकर अन्धक का वहाँ जाना और नन्दीश्वर के साथ युद्ध, अन्धक के प्रहारसे नन्दीश्वर की मूर्च्छा, पार्वती के आवाहन से देवियों का प्रकट होकर युद्ध करना, शिव का आगमन और युद्ध, शिव द्वारा शुक्राचार्य का निगला जाना, शिव की प्रेरणा से विष्णु का काली-रूप धारण कर के दानवों के रक्त का पान करना, शिव का अन्धक को अपने त्रिशूल में पिरोना और युद्ध की समाप्ति"

127. Rudra Samhita; Yuddh Khand - Adhyay 43 / श्रीरुद्र संहिता (युद्ध-पंचम खण्ड) तेंतालीसवाँ अध्याय25 Jul 202300:08:38

"हिरण्यकशिपु की तपस्या और ब्रह्मा से वरदान पाकर उसका अत्याचार, नृसिंह द्वारा उसका वध और प्रह्लाद को राज्य-प्राप्ति"

126. Rudra Samhita; Yuddh Khand - Adhyay 42 / श्रीरुद्र संहिता (युद्ध-पंचम खण्ड) बयालीसवां अध्याय 25 Jul 202300:10:28

"उमा द्वारा शम्भु के नेत्र मूँद लिये जाने पर अन्धकार में शम्भु के पसीने से अन्धकासुर की उत्पत्ति, हिरण्याक्ष की पुत्रार्थ तपस्या और शिव का उसे पुत्ररूप में अन्धक को देना, हिरण्याक्ष का त्रिलोकी को जीत कर पृथ्वी को रसातल में ले जाना और वराह रूपधारी विष्णु द्वारा उसका वध"

125. Rudra Samhita; Yuddh Khand - Adhyay 41 / श्रीरुद्र संहिता (युद्ध-पंचम खण्ड) इकतालीसवां अध्याय24 Jul 202300:07:26

"विष्णु द्वारा तुलसी के शील-हरण का वर्णन, कुपित हुई तुलसी द्वारा विष्णु को शाप देना, शम्भू द्वारा तुलसी और शालग्राम - शिला के माहात्म्य का वर्णन"

124. Rudra Samhita; Yuddh Khand - Adhyay 36 - 40 / श्रीरुद्र संहिता (युद्ध-पंचम खण्ड) छत्तीसवें अध्याय से लेकर चालीसवें अध्याय तक24 Jul 202300:15:59

देवताओं और दानवों का युद्ध, शंखचूड के साथ वीरभद्र का संग्राम, पुनः उसके साथ भद्रकाली का भयंकर युद्ध करना और आकाशवाणी सुन कर निवृत्त होना, शिवजी का शंखचूड के साथ युद्ध और आकाशवाणी सुन कर युद्ध से निवृत्त हो विष्णु को प्रेरित करना, विष्णु द्वारा शंखचूड के कवच और तुलसी के शील का अपहरण, फिर रुद्र के हाथों त्रिशूल द्वारा शंखचूड का वध, शंख की उत्पत्ति का कथन

123. Rudra Samhita; Yuddh Khand - Adhyay 31 - 35 / श्रीरुद्र संहिता (युद्ध-पंचम खण्ड) इकत्तीसवें अध्याय से लेकर पैंतीसवें अध्याय तक24 Jul 202300:14:45

"देवताओं का रुद्र के पास जाकर अपना दुःख निवेदन करना, रुद्र द्वारा उन्हें आश्वासन और चित्ररथ को शंखचूड के पास भेजना, चित्ररथ के लौटने पर रुद्र का गणों, पुत्रों और भद्रकाली सहित युद्ध के लिये प्रस्थान, उधर शंखचूड का सेना सहित पुष्पभद्रा के तट पर पड़ाव डालना तथा दानव राज के दूत और शिव की बातचीत"

122. Rudra Samhita; Yuddh Khand - Adhyay 22 - 30 / श्रीरुद्र संहिता (युद्ध-पंचम खण्ड) बाइसवें अध्याय से लेकर तीसवें अध्याय तक24 Jul 202300:12:26

शंखचूड का असुरराज्य पर अभिषेक और उसके द्वारा देवों का अधिकार छीना जाना, देवों का ब्रह्मा की शरण में जाना, ब्रह्मा का उन्हें साथ लेकर विष्णु के पास जाना, विष्णु द्वारा शंखचूड के जन्म का रहस्योद्घाटन और फिर सब का शिव के पास जाना और शिव-सभा में उनकी झाकी करना तथा अपना अभिप्राय प्रकट करना

247. Vayviya Samhita (Uttar Khand) Adhyay - 20 / वायवीय संहिता (उत्तरार्द्ध) - बीसवाँ अध्याय24 Aug 202300:06:55

"योग्य शिष्य के आचार्यपद पर अभिषेक का वर्णन तथा संस्कार के विविध प्रकारों का निर्देश"

121. Rudra Samhita; Yuddh Khand - Adhyay 13-21 / श्रीरुद्र संहिता (युद्ध-पंचम खण्ड) तेरहवें अध्याय से लेकर इक्कीसवें अध्याय तक24 Jul 202300:14:57

दम्भ की तपस्या और विष्णु द्वारा उसे पुत्रप्राप्ति का वरदान, शंखचूड का जन्म, तप और उसे वर प्राप्ति, ब्रह्माजी की आज्ञा से उसका पुष्कर में तुलसी के पास आना और उसके साथ वार्तालाप, ब्रह्माजी का पुनः वहाँ प्रकट होकर दोनों को आशीर्वाद देना और शंखचूड का गान्धर्व विवाह की विधि से तुलसी का पाणि-ग्रहण करना

120. Rudra Samhita; Yuddh Khand - Adhyay 11 & 12 / श्रीरुद्र संहिता (युद्ध-पंचम खण्ड) "ग्यारहवाँ अध्याय एवं अध्याय"23 Jul 202300:07:38

देवों के स्तवन से शिवजी का कोप शान्त होना और शिवजी का उन्हें वर देना, मय दानव का शिवजी के समीप आना और उनसे वर-याचना करना, शिवजी से वर पाकर मय का वितललोक में जाना

119. Rudra Samhita; Yuddh Khand - Adhyay 9 & 10 / श्रीरुद्र संहिता (युद्ध-पंचम खण्ड) "नवाँ एवं दशवाँ अध्याय"23 Jul 202300:19:58

सर्वदेवमय रथ का वर्णन, शिवजी का उस रथ पर चढ़ कर युद्ध के लिये प्रस्थान, उनका पशुपति नाम पड़ने का कारण, शिवजी द्वारा गणेश का पूजन, और त्रिपुर-दाह, मय दानव का त्रिपुर से जीवित बच निकलना

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