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Explorez tous les épisodes du podcast MahiShAsuramardinI Stotra Class in Sanskrit
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| Titre | Date | Durée | |
|---|---|---|---|
| Mahishasuramardini-20-21 | 28 Mar 2016 | ||
तव विमलेन्दुकुलं वदनेन्दुमलं सकलं ननु कूलयते
किमु पुरुहूत-पुरीन्दुमुखी-सुमुखीभिरसौ विमुखी क्रियते ।
मम तु मतं शिवनामधने भवती कृपया किमुत क्रियते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥ २० ॥
अयि मयि दीनदयालुतया कृपयैव त्वया भवितव्यमुमे
अयि जगतो जननी कृपयाऽसि यथाऽसि तथाऽनुमितासिरते ।
यदुचितमत्र भवत्युररि कुरुतादुरुतापमपाकुरुते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥ २१ ॥ | |||
| Mahishasuramardini-18-19 | 21 Mar 2016 | ||
पदकमलं करुणानिलये वरिवस्यति योऽनुदिनं स शिवे
अयि कमले कमलानिलये कमलानिलयः स कथं न भवेत् ।
तव पदमेव परम्पदमित्यनुशीलयतो मम किं न शिवे
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥ १८ ॥
कनकलसत्कल-सिन्धुजलैरनुसिञ्चिनुते गुण-रङ्गभुवम्
भजति स किं न शचीकुच-कुम्भ-तटी-परिरम्भ-सुखानुभवम् ।
तव चरणं शरणं करवाणि नतामरवाणि निवासि शिवम्
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥ १९ ॥ | |||
| Mahishasuramardini-05 | 18 Jan 2016 | ||
अयि रण-दुर्मद-शत्रु-वधोदित-दुर्धर-निर्जर-शक्तिभृते
चतुर-विचार-धुरीण-महाशिव-दूतकृत-प्रमथाधिपते ।
दुरित-दुरीह-दुराशय-दुर्मति-दानवदूत-कृतान्तमते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ५ ॥ | |||
| Mahishasuramardini-04 | 11 Jan 2016 | ||
अयि शतखण्ड-विखण्डित-रुण्ड-वितुण्डित-शुण्ड-गजाधिपते
रिपु-गज-गण्ड-विदारण-चण्ड-पराक्रम-शुण्ड-मृगाधिपते ।
निज-भुज-दण्ड-निपातित-खण्ड-विपातित-मुण्ड-भटाधिपते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ४ ॥ | |||
| Mahishasuramardini-03 | 04 Jan 2016 | ||
अयि जगदम्ब-मदम्ब-कदम्ब-वनप्रिय-वासिनि हासरते
शिखरि शिरोमणि तुङ्ग-हिमालय-शृङ्ग-निजालय-मध्यगते ।
मधु-मधुरे मधु-कैटभ-गञ्जिनि कैटभ-भञ्जिनि रासरते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ३ ॥ | |||
| Mahishasuramardini-02 | 29 Dec 2015 | ||
सुरवरवर्षिणि दुर्धरधर्षिणि दुर्मुखमर्षिणि हर्षरते
त्रिभुवनपोषिणि शङ्करतोषिणि किल्बिषमोषिणि घोषरते ।
दनुज-निरोषिणि दितिसुत-रोषिणि दुर्मद-शोषिणि सिन्धुसुते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २ ॥ | |||
| Mahishasuramardini-01 | 29 Dec 2015 | ||
अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दनुते
गिरिवर-विन्ध्य-शिरोधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते ।
भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १ ॥ | |||
| Mahishasuramardini-16-17 | 14 Mar 2016 | ||
कटितट-पीत-दुकूल-विचित्र-मयूख-तिरस्कृत-चन्द्ररुचे
प्रणत-सुरासुर-मौलिमणिस्फुर-दंशुल-सन्नख-चन्द्ररुचे ।
जित-कनकाचल-मौलिपदोर्जित-निर्भर-कुञ्जर-कुम्भकुचे
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥ १६ ॥
विजित-सहस्रकरैक-सहस्रकरैक-सहस्रकरैकनुते
कृतसुरतारक-सङ्गरतारक-सङ्गरतारक-सूनुसुते ।
सुरथ-समाधि समानसमाधि समाधिसमाधि सुजातरते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥ १७ ॥ | |||
| Mahishasuramardini-14-15 | 07 Mar 2016 | ||
कमल-दलामल-कोमल-कान्ति कलाकलितामल-भाललते
सकल-विलास-कलानिलयक्रम-केलि-चलत्कल-हंसकुले ।
अलिकुल-सङ्कुल-कुवलय-मण्डल-मौलिमिलद्भकुलालि-कुले
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥ १४ ॥
करमुरली-रव-वीजित-कूजित-लज्जित-कोकिल-मञ्जुमते
मिलित-पुलिन्द-मनोहर-गुञ्जित-रञ्जितशैल-निकुञ्जगते ।
निजगुणभूत-महाशबरीगण-सद्गुण-सम्भृत-केलितले
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥ १५ ॥ | |||
| Mahishasuramardini-12-13 | 29 Feb 2016 | ||
सहित-महाहव-मल्लम-तल्लिक-मल्लित-रल्लक-मल्लरते
विरचित-वल्लिक-पल्लिक-मल्लिक-भिल्लिक-भिल्लिक-वर्गवृते ।
सितकृत-फुल्लसमुल्ल-सितारुण-तल्लज-पल्लव-सल्ललिते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥ १२ ॥
अविरल-गण्ड-गलन्मद-मेदुर-मत्त-मतङ्गज-राजपते
त्रिभुवन-भूषण-भूत-कलानिधि रूप-पयोनिधि राजसुते ।
अयि सुद-तीजन-लालसमानस-मोहन-मन्मथ-राजसुते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥ १३ ॥ | |||
| Mahishasuramardini-11 | 22 Feb 2016 | ||
अयि सुमनः सुमनः सुमनः सुमनः सुमनोहर-कान्तियुते
श्रित-रजनी-रजनी-रजनी-रजनी-रजनीकर-वक्त्रवृते ।
सुनयन-विभ्रमर-भ्रमर-भ्रमर-भ्रमर-भ्रमराधिपते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ११ ॥ | |||
| Mahishasuramardini-10 | 15 Feb 2016 | ||
जय जय जप्य-जयेजय-शब्द-परस्तुति-तत्पर-विश्वनुते
भण-भण-भिञ्जिमि-भिङ्कृत-नूपुर-सिञ्जित-मोहित-भूतपते ।
नटित-नटार्ध-नटीनट-नायक-नाटित-नाट्य-सुगानरते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १० ॥ | |||
| Mahishasuramardini-09 | 08 Feb 2016 | ||
सुरललना-ततथेयि-तथेयि-तथाभिनयोदर-नृत्य-रते
हासविलास-हुलास-मयिप्रण-तार्तजनेमित-प्रेमभरे ।
धिमिकिट-धिक्कट-धिक्कट-धिमिध्वनि-घोरमृदङ्ग-निनादरते
जय जय हे महिषासुर-मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ९ ॥ | |||
| Mahishasuramardini-08 | 01 Feb 2016 | ||
धनुरनु-सङ्ग-रणक्षणसङ्ग-परिस्फुर-दङ्ग-नटत्कटके
कनक-पिशङ्ग-पृषत्क-निषङ्ग-रसद्भट-शृङ्ग-हतावटुके ।
कृत-चतुरङ्ग-बलक्षिति-रङ्ग-घटद्बहुरङ्ग-रटद्बटुके
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ८ ॥ | |||
| Mahishasuramardini-06 | 25 Jan 2016 | ||
अयि शरणागत-वैरि-वधूवर-वीर-वराभय-दायकरे
त्रिभुवन-मस्तक-शूल-विरोधि शिरोधि कृतामल-शूलकरे ।
दुमिदुमि-तामर-दुन्दुभिनाद-महो-मुखरीकृत-तिग्मकरे
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ६ ॥ | |||
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